सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

कांग्रेस जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में हुए आंदोलन में नहीं जुटे 100 कार्यकर्ता

जिलाध्यक्ष स्वतंत्र जोशी गंधवानी तक ही सीमित हुए

प्रतिनिधि नितिन राठौर)। जिला मुख्यालय पर शनिवार को कांग्रेस द्वारा आयोजित आंदोलन ने पार्टी के भीतर की दयनीय सांगठनिक स्थिति को उजागर कर दिया है। जिला अध्यक्ष स्वतंत्र जोशी के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में पूरी कोशिशों के बावजूद कांग्रेस 100 कार्यकर्ताओं का आंकड़ा भी नहीं छू पाई।

इतनी कम संख्या में भीड़ जुटने के बाद अब पार्टी की जमीनी पकड़ और राजनीतिक वजूद पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय राजनीतिक गलियारों में इस फ्लॉप शो का मुख्य जिम्मेदार जिला अध्यक्ष स्वतंत्र जोशी की कार्यप्रणाली को माना जा रहा है। पार्टी के ही अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि जिला अध्यक्ष का प्रभाव और ध्यान सिर्फ गंधवानी विधानसभा क्षेत्र तक ही सीमित होकर रह गया है, जिसके कारण जिले के अन्य क्षेत्रों के कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

धार जैसे महत्वपूर्ण जिला मुख्यालय पर हुए इस आंदोलन में स्थानीय बड़े नेताओं और विधायकों की दूरी भी साफ नजर आई, जो आपसी समन्वय की कमी और गुटबाजी की ओर इशारा करती है। लगातार चुनावी हार से पस्त जमीनी कार्यकर्ताओं में पहले से ही भारी निराशा है, और नेतृत्व की इस विफलता ने उनके मनोबल को और तोड़ दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि धार जिले में कांग्रेस ने जल्द ही गुटबाजी को खत्म कर संगठन में बड़ा फेरबदल नहीं किया, तो आगामी चुनावों में उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस की इस सांगठनिक कमजोरी का सीधा फायदा भाजपा को अपनी पकड़ मजबूत करने में मिल रहा है। इस फ्लॉप शो के बाद अब जिला कांग्रेस में अंतर्कलह खुलकर सड़क पर आ गई है। शनिवार के प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आते ही पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और असंतुष्ट गुट ने जिला अध्यक्ष की कार्यशैली पर सीधे सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, जिले के कुछ पूर्व विधायकों और ब्लॉक अध्यक्षों ने इस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट सीधे प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजने की तैयारी कर ली है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब जिला मुख्यालय के आंदोलन में ही भीड़ नहीं जुटेगी, तो ग्रामीण अंचलों में जनता के बीच क्या संदेश जाएगा। वही सोशल मीडिया पर भी पार्टी का मखौल उड़ रहा है, इस आंदोलन की विफलता का असर सोशल मीडिया पर भी साफ देखा जा रहा है।

भाजपा के स्थानीय प्रवक्ताओं और नेताओं ने चुटकी लेते हुए लिखा कि 'जिस पार्टी के पास 100 कार्यकर्ता नहीं बचे, वह जनता के हक की लड़ाई क्या लड़ेगी, वहीं सूत्रों की माने तो कांग्रेस के ही कई सक्रिय कार्यकर्ता कार्यक्रम के दौरान ही अपनी भड़ास निकालते सुने गए कि संगठन को ड्राइंग रूम की राजनीति से बाहर निकालकर जमीनी नेताओं को कमान सौंपनी चाहिए, वरना धार जिले में पार्टी का सूपड़ा साफ होने में देर नहीं लगेगी,इस पूरे विवाद के बाद धार जिला कांग्रेस में बड़े बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं, दिल्ली और भोपाल में बैठे शीर्ष नेतृत्व तक यह बात पहुंच चुकी है कि गंधवानी से बाहर जिला अध्यक्ष का कोई खास प्रभाव नहीं दिख रहा है, राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि आगामी नगरीय निकाय और पंचायतो के चुनावों को देखते हुए संगठन किसी नए और सर्वमान्य चेहरे को जिला कमान सौंप सकता है, जो सभी गुटों को एक साथ मंच पर ला सके।