सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

फर्जी वेतन खाता घोटाला- कौन ले रहा है वेतन होगा फिजिकल वेरीफिकेशन

गड़बड़ी के दो तरीके पहला- उपस्थिति लगाओ काम से गायब हो जाओ दूसरा- निजी स्टाफ रखो और वेतन निगम से निकालो

फर्जी नामांतरण घोटाले के बाद अब नगर निगम इंदौर में फर्जी वेतन खाता घोटाला सामने आने से हड़कंप मच गया है। शुरुआती जांच में पांच कर्मचारियों के नाम पर संदिग्ध तरीके से वेतन आहरण का मामला सामने आया है, लेकिन अधिकारियों को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर घोटाले का दायरा और बड़ा हो सकता है। इसे देखते हुए निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने जांच समिति गठित कर पूरे मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।

आयुक्त के निर्देश पर अब जिन कर्मचारियों के खातों में वेतन जमा हो रहा है, उनका भौतिक सत्यापन किया जाएगा। विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित कराएं और स्थापना शाखा की सूची के आधार पर मस्टर, विनियमित एवं आउटसोर्स कर्मचारियों का क्रॉस वेरिफिकेशन करें। यह भी जांचा जाएगा कि जिस कार्य के लिए कर्मचारी को वेतन दिया जा रहा है, वह वास्तव में उसी स्थान पर कार्यरत है या

सबसे अधिक इन पर संदेह

सूत्रों के अनुसार नगर निगम में नहीं। स्थायी, विनियमित, मस्टर और आउटसोर्स श्रेणी के कर्मचारी कार्यरत हैं। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि अनियमितताएं सबसे अधिक मस्टर और आउटसोर्स कर्मचारियों के नाम पर हो सकती हैं।

कम वेतन और अस्थायी नियुक्ति का लाभ उठाकर फर्जी खातों के जरिए वेतन निकाले जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। निजी स्टाफ के भुगतान की भी जांच होगी। सूत्रों का दावा है कि कुछ मामलों में फर्जी वेतन खातों का उपयोग निजी स्टाफ का भुगतान करने के लिए भी किया जा सकता है।

यदि जांच इस पहलू तक पहुंची तो कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी वेतनधारियों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा और यदि किसी भी स्तर पर फर्जीवाड़ा या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।