खड़े हो रहे है सवाल
किसान नेता बबलू जाधव ने कहा कि फसल की बर्बादी पर किसान आत्महत्या प्रयास के मामले में प्रशासनिक उदासीनता ने कई सवाल खडे किए है। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज हुई है। नमूने जांच के लिए भेजे गए और संबंधित व्यापारी को जमानत भी मिल गई, लेकिन आज तक प्रभावित किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा नहीं मिला।
जिस किसान को फसल बर्बादी के कारण अस्पताल पहुंचना पड़ा, उसे भी उपचार के लिए कोई विशेष आर्थिक सहायता प्रदान नहीं की गई। वहीं शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार कृषि अधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ‘किसान कल्याण वर्ष' मना रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसान अपनी बर्बाद फसल, बढ़ते कर्ज और आर्थिक संकट से जूझ रहा है।
यदि किसानों की शिकायतों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई होती तो शायद किसानों को इतना बड़ा नुकसान नहीं उठाना पड़ता। भारतीय किसान एवं मजदूर सेना ने मांग की है कि प्रभावित किसानों को तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए, पीड़ित किसान के उपचार हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की जाए तथा पूरे मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए अन्यथा संगठन किसानों के हित में आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
