सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

करोड़ों खर्चकर देवास नाका पर बनी फूड टेस्टिंग लैब क्या रक्षाबंधन से पहले होगी शुरू?

पिछले साल अक्टूम्बर माह से तैयार करोड़ों की लागत से देवास नाका तलावली चांदा के पास बनी प्रदेश की तीसरी आधुनिक फूड एंड ड्रग लैब में 9 माह बाद भी सेम्पलों की जांच शुरू नहीं हो पाई। जबकि प्रदेश की आर्थिक राजधानी और खानपान के लिए देशभर में पहचान रखने वाले इंदौर को मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए ही यहां लगभग तीन साल से भी ज्यादा समय में अत्याधुनिक फूड एंड ड्रग लैब का निर्माण हो पाया था। लेकिन अभी तक जांच शुरू नहीं की गई।

गौरतलब है कि पिछले साल मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने खुद अक्टूबर 2025 में 8.30 करोड़ रुपये की लागत से तलावली चांदा स्थित नवीन लैब का लोकार्पण किया था, लेकिन अब हालत यह है कि नौ माह बीत जाने के बाद भी सैंपल जांच शुरू नहीं हो सकी है। अभी भी यहां से खाद्य सेम्पल जांच के लिए भोपाल भेजने पड़ रहें है।

एनबीएल सर्टिफिकेट के कारण अटकी जांच

बड़ी बात यह है कि देवास नाका क्षेत्र में तैयार आधुनिक बहु मंजिला भवन में नवीन लैब में अत्याधुनिक उपकरण भी स्थापित हो चुकें है और आठ सदस्यीय स्टाफ भी तैनात कर दिया गया है। इसके बावजूद एनएबीएल (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फार टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज) का प्रमाणपत्र नहीं मिलने के कारण प्रयोगशाला संचालन शुरू नहीं हो पाया है। जिसके कारण इंदौर और आसपास के जिलों से लिए जा रहे खाद्य एवं औषधि नमूनों को जांच के लिए भोपाल स्थित राज्य स्तरीय प्रयोगशाला भेजा जा रहा है।

मिलावट के मामले लगातार आ रहे सामने

शहर में लगातार खान पान के पदार्थों में मिलावट के मामले रोजाना सामने आ रहे है। जबकि पिछले साल लोकार्पण के दौरान जनप्रतिनिधि और अधिकारियों ने लैब को मिलावट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का मजबूत हथियार बताया था। यही नहीं दावें भी किए जा रहे थे कि इससे जांच प्रक्रिया तेज होगी और दोषियों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी, लेकिन आम लोगों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।

वहीं वर्तमान में इंदौर में मिलावट के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। यहां मसाले, दूध, घी और आइसक्रीम सहित अन्य खान पान की च़ीजों में मिलावट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।

14 दिन का नियम महीनों तक नहीं आती रिपोर्ट

खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए जाने वाले खाद्य पदार्थ के सैंपलों की रिपोर्ट भोपाल से आने में कई बार महीनों का समय लग जाता है। इस देरी का सीधा फायदा मिलावटखोरों को मिलता है। रक्षाबंधन, दीपावली जैसे बड़े त्योहारों में मिठाइयां खप जाती हैं, लेकिन रिपोर्ट ही नहीं आ पाती है। लैब शुरू होने का सबसे बड़ा फायदा ही यहीं मिलेगा कि रिपोर्ट जल्दी आ सकेगी। खाद्य आधिकारी रक्षाबंधन से पहले जल्द लैब शुरू करवाने का दावा कर रहें है लेकिन दावों का क्या दावे बनकर रह जाते है।