अब 100 जीबी के डेटा से होगी फर्जी नामांतरण घोटाले की जांच
आयुक्त बोले एक सप्ताह में पूरी हो जाएगी इन्वेस्टिगेशन
फर्जी नामांतरण घोटाला अब नगर निगम के चर्चित घोटाले में शामिल हो चुका है जिससे 51 परिवार अब सिविल कोर्ट के चक्कर काटने के लिए मजबूर हो गए हैं क्योंकि उनकी संपत्ति किसी और को फर्जी नामांतरण के जरिए रजिस्ट्री करके बेची जा चुकी है। अब रजिस्ट्रेशन करने के लिए उनके पास सिविल कोर्ट में परिवाद दायर करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है। वहीं इस मामले में ताजा अपडेट नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंगला ने देते हुए बताया कि नगर निगम ई पालिका पोर्टल भोपाल से विस्तृत जांच के लिए 100 जीबी का डाटा हमें और मिला है इस डाटा के माध्यम से हम पूरे मामले की जड़ तक पहुंचने का प्रयास करेंगे।
राजस्व विभाग के अलावा इस तरह से फर्जीवाड़ा किसी और विभाग में तो नहीं किया जा रहा इसकी भी संभावना को लेकर जांच की जा रही है इसके अलावा असली आरोपियों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
निगम आयुक्त ने बताया कि आखिरकार और कितने लोगों के साथ इस तरह की धोखाधड़ी तो नहीं हुई इसकी जांच भी की जा रही है। हमने पुराने 354 संपत्ति कर खाते जिनके नामांतरण हुए थे उन्हें पुराने की प्रक्रिया पूरी करें। निगम आयुक्त ने इसके लिए औचक निरीक्षण के निर्देश देते हुए कहा कि मुझे यदि कोई लापरवाही इस दौरान दिखाई देती है तो सीधे एआरओ और संबंधित स्टाफ पर कार्रवाई की जाएगी।
वहीं दूसरी ओर जांच में लगातार हो रही देरी और छोटे कर्मचारी पर अब तक हुई कार्रवाई पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। कांग्रेस ने इस मामले पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव को घेरने के साथ मिली भगत के आरोप तक लगा दिए हैं, कांग्रेस नेता चिंटू चौकसे आरोप लगाया है कि नगर निगम फर्जी बिल घोटाले, फर्जी नामांतरण घोटाले के आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि फर्जी नामांतरण घोटाला सामने आए दो माह का समय बीत गया है लेकिन मामूली छोटे कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटर पर कार्रवाई की गई, किसी बड़े अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
मामले में उपायुक्त एसके सागर की भूमिका सीधे तौर पर थी। विभाग के नाते उनकी जिम्मेदारी भी इस घोटाले पर तय की जानी थी लेकिन एक माह काफी दबाव बना केवल उनका विभाग बदला गया।
