महापौर का दावा- आधुनिक इंदौर के निर्माण की नींव रगी
नगर निगम को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किया काम
शहर में पानी, ड्रेनेज और सड़क के लिए हुआ सबसे बड़ा काम
4 साल के कामकाज को स्वर्णिम अध्याय के रूप में पहचाना जाएगा
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दावा किया है कि उनके कार्यकाल के दौरान आधुनिक इंदौर के निर्माण की नींव रखी गई। नगर निगम को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सबसे बेहतर काम किया गया। शहर में पानी देने एवं सड़क के लिए सबसे बड़ा काम हुआ। इस 4 साल के कामकाज को भविष्य में स्वर्णिम अध्याय के रूप में पहचाना
भार्गव ने बताया कि पिछले चार वर्षों के दौरान इंदौर नगर निगम ने विकास, सुशासन और जनभागीदारी का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया है, जिसने इंदौर को केवल देश का सबसे स्वच्छ शहर ही नहीं, बल्कि सतत एवं स्मार्ट शहरी विकास का राष्ट्रीय मॉडल भी बनाया है। इस अवधि में अधोसंरचना, पेयजल, सीवरेज, सड़क, पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल गवर्नेंस, वित्तीय प्रबंधन, खेल, सामाजिक सुरक्षा तथा नागरिक सुविधाओं के क्षेत्र में कामकाज के लिए बड़े फैसले लिए गए।
नगर निगम का लक्ष्य केवल वर्तमान की आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं, बल्कि आने वाले कई दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भविष्य के इंदौर की मजबूत नींव तैयार करना है। इसी सोच के साथ विकास, पर्यावरण संरक्षण, आधुनिक तकनीक, वित्तीय नवाचार और नागरिक सहभागिता को समान
उन्होंने कहा कि इंदौर नगर निगम ने देश का पहला म्युनिसिपल ग्रीन बॉन्ड जारी कर शहरी वित्तीय प्रबंधन में नया इतिहास रचा। इस राशि से जलूद क्षेत्र में 60 मेगावाट क्षमता का सोलर पार्क विकसित किया गया, जिससे नगर निगम की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति होगी तथा बिजली व्यय में 4 करोड़ प्रतिमाह की कमी आ रही है। भविष्य जाएगा।
प्राथमिकता दी गई। की पेयजल की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 2,156.16 करोड़ रु. की लागत से चार मेगा जल प्रदाय परियोजनाओं का कार्य प्रारंभ किया गया। इसके अन्तर्गत 2.48 लाख नए घरेलू नल कनेक्शन दिए जाएंगे तथा स्मार्ट जल प्रबंधन प्रणाली विकसित की जा रही है।
इसके अलावा 84.32 करोड़ रु. की लागत से 38 जलापूर्ति परियोजनाओं के माध्यम से नई डीआई एवं एचडीपीई पाइपलाइन, पंपिंग स्टेशन, फीडर मेन, भूमिगत सम्प तथा वितरण नेटवर्क का विस्तार किया गया। नर्मदा जल प्रदाय योजना के चौथे चरण को गति देकर भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि नगर निगम ने सीवर मुक्त शहर एवं स्वच्छ नदियां का लक्ष्य निर्धारित किया है। पिछले चार वर्षों में 122.09 करोड़ रु. की लागत से सात प्रमुख सीवरेज परियोजनाएं पूर्ण हुईं तथा 30.65 किलोमीटर नई सीवर लाइन बिछाई गई। वर्तमान में शहर में 2,300.68 किलोमीटर सीवर नेटवर्क, 2.04 लाख से अधिक मैनहोल, 11 एसटीपी एवं 436.5 एमएलडी उपचार क्षमता उपलब्ध है। सिरपुर में 20 एमएलडी क्षमता का नया एसटीपी विकसित किया गया तथा आईटीआई-अनूप टॉकीज, बाणगंगा, खजराना,
आने वाले समय में क्या काम करेंगे?
भार्गव ने कहा कि आगामी वर्षों में नगर निगम का फोकस सीवर मुक्त इंदौर, अमृत- 2.0, नमामि गंगे, सिंहस्थ-2028, नई जल प्रदाय परियोजनाएं, आधुनिक सड़क नेटवर्क, डिजिटल गवर्नेंस, पर्यावरण संरक्षण, उपचारित जल के पुनः उपयोग, जलवायु अनुकूल विकास तथा नागरिक सहभागिता आधारित शहरी प्रबंधन पर रहेगा। चाणक्यपुरी सहित कई क्षेत्रों में नेटवर्क का विस्तार हुआ। 1,746 बड़े एवं 5,624 छोटे आउटफॉल बंद कर नदियों में गंदे पानी का प्रवाह रोका गया।
वर्तमान में 1,900 करोड़ रु. की परियोजनाओं की कार्ययोजना तैयार की गई है, जिनसे 687 एमएलडी नई उपचार क्षमता एवं 450 किलोमीटर से अधिक नया नेटवर्क विकसित होगा।
800 करोड़ की लागत से सड़कों के निर्माण का काम शुरू
भार्गव ने बताया कि शहर की बढ़ती आबादी और भविष्य की यातायात आवश्यकताओं को देखते हुए 800 करोड़ रु. से अधिक की सड़क परियोजनाओं को गति दी गई। 23 मास्टर प्लान सड़कों सहित लगभग 36 प्रमुख सड़क एवं लिंक रोड विकसित किए गए। बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने, मल्टीलेवल पार्किंग, एलिवेटेड कॉरिडोर, प्रमुख चौराहों पर लेफ्ट टर्न चौड़ीकरण तथा यातायात सुधार के अनेक कार्य किए गए।
उन्होंने कहा कि निगम के लाखों दस्तावेजों का डिजिटलीकरण किया गया तथा एक हजार वर्गफीट तक के भवन नक्शों की 24 घंटे में स्वीकृति की व्यवस्था लागू की गई। सीसीटीवी सर्विलांस नीति, वार्डवार मास्टर प्लान तथा स्मार्ट प्रशासन को भी नई दिशा दी गई। निगम ने लगातार दो वर्षों तक 1,000 करोड़ रु. से अधिक का राजस्व संग्रह कर नया रिकॉर्ड बनाया।
निगम ने 17 विद्यालयों का आधुनिकीकरण करते हुए नए भवन, विज्ञान प्रयोगशालाएं, अतिरिक्त कक्ष, स्टाफ रूम एवं ऑडिटोरियम विकसित किए गए, जिन पर 15 करोड़ रु. से अधिक का निवेश किया गया। अगले चरण में लगभग 30 करोड़ रु. की लागत से 24 नए विद्यालय विकसित किए जाएंगे। प्रत्येक वार्ड में संजीवनी क्लिनिक स्थापित करने का कार्य किया गया।
महिला सुरक्षा के लिए शी लाउंज एवं पिंक बस जैसी पहल शुरू की गई। सभी 85 वार्डों में योग शेड विकसित करने के तहत 22 योग शेड पूर्ण हो चुके हैं, 5 के टेंडर जारी हैं तथा 8 नए स्थलों का चयन किया गया है। निगम ने 153 अवैध कॉलोनियों का नियमितीकरण कर हजारों परिवारों को मूलभूत नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराईं।
कॉलोनी सेल के माध्यम से 1,789.55 करोड़ रु. का राजस्व प्राप्त हुआ तथा 30 नई कॉलोनियों में विकास कार्य प्रगति पर हैं। स्वच्छता के क्षेत्र में इंदौर ने वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। देश-विदेश के अनेक दलों ने इंदौर के स्वच्छता मॉडल का अध्ययन किया।
उन्होंने कहा कि जू में 14-डी थिएटर एवं आधुनिक सुविधाओं का विकास किया गया। नगर निगम का नया परिषद भवन तैयार किया गया। सराफा बाजार के मूल स्वरूप के संरक्षण, प्रमुख उद्यानों के विकास, हुकुमचंद मिल विवाद के समाधान, विदेशों में रहने वाले इंदौरवासियों के लिए विशेष सुविधा तंत्र तथा इंदौर मेट्रो जैसी परियोजनाओं को भी गति मिली।
