सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

संपादकीय दिल्ली में बेखौफ अपराध: एक दिन में पांच हत्याओं ने कानून-व्यवस्था पर फिर खड़े किए सवाल स

पर भी नागरिक स्वयं को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। देश की राजधानी होने के नाते यह उम्मीद स्वाभाविक है कि यहां कानून और सुरक्षा व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर और चौकस होगी और आपराधिक मानसिकता के लोगों के भीतर पुलिस का खौफ होगा। मगर बुधवार को दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में एक के बाद एक हत्या की पांच घटनाओं ने एक बार फिर यही साबित किया है कि सरकारी दावे चाहे जो हों, सच यह है कि यहां भी अपराधी तत्त्वों के भीतर कानून का कोई खौफ नहीं दिखता।

बहुत मामूली बातों पर भी कोई किसी की जान ले लेता है और उसके बाद जब घटनाएं सुर्खियों में आ जाती हैं, तब कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस की नींद खुलती है। गौरतलब है कि बुधवार को हत्या की पांच वारदात से दिल्ली एक बार फिर सहम गई है। एक घटना में नशे की लत के शिकार बेटे ने बुजुर्ग मां की जान ले ली, तो दूसरी में कुछ लोगों ने घात लगाकर सत्रह साल के किशोर की चाकू घोंपकर हत्या कर दी।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बीते दिनों पार्क में बैठे एक युवक की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी गई कि उसने प्रेमिका से छेड़छाड़ करने पर विरोध जताया था। सच यह है कि पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली में भी अपराध का दायरा बढ़ता गया है। यहां सुरक्षा की कई परतें होने पर भी नागरिक स्वयं को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं।

कई बार तो छोटी-छोटी बातों पर लोग इस कदर उग्र हो जाते हैं कि वे किसी भी निर्दोष की जान ले लेते हैं। यह कानून-व्यवस्था का मसला जरूर है, लेकिन इसके समाजशास्त्रीय पक्ष को भी समझना होगा कि आखिर किन वजहों से लोगों के भीतर इस तरह की बेलगाम और हिंसक आक्रामकता घर कर रही है। वहीं आत्मकेंद्रित हो रहे इस समाज में अब कोई किसी को बचाने इसलिए आगे नहीं आता, क्योंकि उन्हें लगता है कि कानून की जटिलताओं में कहीं वह स्वयं न उलझ जाए।

विचित्र है कि सड़कों और गलियों में हत्या कर दी जाती है और उसके बाद पुलिस आरोपियों की तलाश में निकलती है, लेकिन ऐसी घटनाओं को रोक पाने में वह एक तरह

वैभव के टैलेंट के दीवाने हुए ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कोच

कमिंस आए, भुवनेश्वर कुमार आए या फिर कोई और, उन्होंने किसी को नहीं छोड़ा। इसी वजह से ऑस्ट्रेलिया की टीम के पूर्व हेड कोच जस्टिन लैंगर हैरान हैं और कहा है कि उनके जैसा टैलेंट जीवन में नहीं देखा। जस्टिन लैंगर ने कहा, आप इंडिया जाइए, हे भगवान, मैंने कभी इतना टैलेंट नहीं देखा, यह कमाल का है। इस बच्चे वैभव सूर्यवंशी को अपने दूसरे या तीसरे इंटरनेशनल मैच में ही मैन ऑफ द मैच मिल गया। से नाकाम दिख रही है।

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में वैभव सूर्यवंशी ने एक या दो नहीं, बल्कि कई कमाल की पारियां खेली थीं। वे आईपीएल के इस सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज थे, जबकि सबसे ज्यादा छक्के भी उन्होंने ही जड़े थे। वे किसी भी गेंदबाज को उसकी रेप्यूटेशन के हिसाब से नहीं खेलते थे, बल्कि गेंद की मेरिट के हिसाब से खेलते थे। उनके आगे जसप्रीत बुमराह आए, जोश हेजलवुड आए, पैट