सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

चुनाव में खड़ी नहीं हो सकती हूं, लेकिन इंदौर के लिए तो खड़ी हो सकती हूं...

ही संबोधित कर दीजिए। इस पर ताई नहीं मानी और उठकर पोडियम पर आकर अपनी बात कहने लगी। उन्होंने अपनी बात की शुरुआत यह कहकर कि चाहे चुनाव में नहीं खड़ी हो सकती हूं लेकिन इंदौर के लिए तो खड़ी हो सकती हूं।

सबको कर दिया निराश- पिछले

दिनों ताई के द्वारा रेलवे के क्षेत्र में इंदौर की उपेक्षा किए जाने और इंदौर को वाजिब हक नहीं दिए जाने को लेकर केंद्र सरकार के रेल मंत्रालय को एक चिट्ठी लिखी गई थी। यह चिट्ठी मीडिया को भी जारी की गई थी। जिसके परिणाम स्वरुप अखबारों में बड़ी-बड़ी खबर छपी थी।

इसे देखते हुए ही अभ्यास मंडल के द्वारा इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उन्हें बुलाया गया था। आयोजन करने वालों को उम्मीद थी कि ताई इंदौर की उपेक्षा पर जमकर बोलेगी और सरकार के द्वारा किए जा रहे भेदभाव को उजागर करेगी। जब ताई ने अपना संबोधन शुरू किया तो सबसे पहले ही उन्होंने कह दिया इंदौर उपेक्षित कहां है।

इंदौर के उपेक्षित नहीं होने का आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल तैयार करवाया गया। मेडिकल कॉलेज को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए केंद्र सरकार के द्वारा करोड़ों रुपए दिए गए हैं। इंदौर का हवाई अड्डा अंतरराष्ट्रीय हो गया है।

उद्योगों के लिए एयर कार्गो की सुविधा हो गई है। जब इतना सब कुछ हो गया है तो फिर इंदौर उपेक्षित कैसे हैं?

अपने कार्यकाल की ही बात

बताई-ताई द्वारा इंदौर के उपेक्षित नहीं होने के जो आधार बताए गए वे सभी वह आधार है जो कि ताई खुद के सांसद पद के कार्यकाल के दौरान इंदौर को सौगात के रूप में मिले थे। उन बातों को ही ताई ने इंदौर की उपलब्धि और उसके उपेक्षित नहीं होने के आधार के रूप में सामने रखा। इस दौरान पिछले 7 साल में कोई सौगात नहीं मिलने जैसे मामले को उन्होंने गोल कर दिया।

उज्जैन को भी अपना लो- राज्य

सरकार के द्वारा विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में इंदौर की बजाय उज्जैन को महत्व दिए जाने के मुद्दे को इशारे में ताई ने समझाया। उन्होंने कहा कि जब हमने महू को अपना लिया। मेरे कार्यकाल के समय नागेश नाम जोशी ने कहा कि इंदौर का रेलवे स्टेशन छोटा है और यहां से बहुत ज्यादा ट्रेनों का संचालन नहीं हो सकता है तो उस समय हमने बहुत सी ट्रेनों का संचालन महू से शुरू करवाया।

इसका परिणाम हुआ कि इंदौर महू तक बढ़ गया। अब यदि उज्जैन में साधनों का विकास हो रहा है तो हमें उसे अपनाना चाहिए। वहां पर अच्छे बड़े अस्पताल बनेंगे बड़े स्कूल कॉलेज बनेंगे तो इंदौर का ही लोड कम होगा।