3 गांव में बनेंगे पीएमएवाय के 5 हजार मकान
तीन घोटाले के कारण नगर निगम का नाम फिर चर्चा में आया आरोपी कर रहे बचने का प्रयास आर्थिक अनियमितता और धोखाधड़ी की जांच जारी
578 लाख का होगा खर्च, निगम ने शुरू की ठेका देने की प्रक्रिया
नगर निगम के द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत तीन गांव में 5 हजार मकान बनाए जाएंगे। इस कार्य पर 578 लाख रुपए खर्च होंगे। नगर निगम ने इसका ठेका देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गरीबों को आवास उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार के द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना बनाई गई है।
इस योजना के तहत मकान बनाकर जहां गरीबों को उपलब्ध करवाए जा रहे हैं तो वही विभिन्न स्थानों पर सड़क चौड़ा करने के दौरान जिन लोगों के मकान पूरे तोड़ दिए जाते हैं तो किए जाने वाले व्यवस्थापन को हम तेज गति से लगेगा जबकि शेष उन लोगों को भी अच्छी स्थिति में आकार दे सकेंगे।
व्यवस्थापन के तहत इन मकान में रहने का मौका को आकार दिया जाए। जिला पूरा हो जाएगा। निगम के द्वारा दिया जाता है। निगम के द्वारा प्रशासन के द्वारा नगर निगम ऐसे परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित किए गए मकान आवंटित किए जाते हैं।
इस समय नगर निगम के पास इस योजना के तहत बने हुए मकान की कमी प़ड़ने लगी है। विभिन्न सड़कों पर जो तोड़फोड़ की जाना है उसमें जितनी बड़ी संख्या में परिवार विस्थापित होने वाले हैं उन परिवारों को देने के लिए निगम के पास मकान नहीं है। ऐसी स्थिति में निगम के द्वारा जिला प्रशासन के साथ समन्वय बनाया जा रहा है।
निगम की इच्छा है कि अलग-अलग क्षेत्र में बड़े पैमाने पर इस योजना के तहत मकान के निर्माण के कार्य
दूर हो जाएगी समस्या
नियम के अधिकारियों का मानना है कि इन स्थानों पर आवास का निर्माण कर दिए जाने से अभी जो आवास की समस्या इंदौर में सामने आ रही है वह दूर हो जाएगी। सड़कों के निर्माण में
को ग्राम रंगवासा, सिंधोड़ा और सनावदिया में जमीन का आवंटन किया गया है। प्रशासन से मिली इस जमीन पर अब नगर निगम के द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास के निर्माण की पहल की जा रही है। निगम के अपर आयुक्त एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रभारी अर्थ जैन ने बताया कि ग्राम रंगवासा में 173 लाख, ग्राम सिंधोडा में 244 लाख और ग्राम सनावदिया में 161 लाख रुपए की लागत से मकान का निर्माण किया जाएगा।
इन सभी स्थान पर मकान बनाने के लिए ठेकेदार एजेंसी के चयन की प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया है। इन सभी स्थानों पर मिलाकर 5000 मकान बनाए जाएंगे। इनमें से ग्राम सिंधोड़ा में मकान के निर्माण में ढाई साल का वक्त
दोनों स्थानों पर यह कार्य 2 साल में ही
इस काम को आकार देने के लिए ठेकेदार एजेंसी के चयन की प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया है। इसके लिए ऑनलाइन ही टेंडर जारी किए गए हैं। इस काम को करने के इच्छुक कंस्ट्रक्शन कंपनियों के प्रतिनिधियों की बैठक भी 22 जुलाई को दोपहर 3 बजे बुलवाई गई है।
सबसे स्वच्छ शहर बनाने वाला इंदौर नगर निगम इन दिनों एक बार फिर घोटाले को लेकर चर्चा में है। नगर निगम में वर्तमान के तीन घोटाले को लेकर निगम की छवि एक बार फिर धूमिल हो रही है। जिसका कारण कमजोर प्रशासनिक कसावट, कर्मचारियों पर नियंत्रण में कमी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों में समन्वय नहीं होना है।
फिलहाल घोटाले की बात की जाए तो नगर निगम के भवन अनुज्ञा शाखा में ही दो घोटाले की जांच की जा रही है। पहले डिमांड नक्शा की जांच जारी है जिसमें ऑनलाइन नक्शे पास किए जाते हैं। 1500 स्क्वायर फीट तक के नक्शे भूखंड स्वामी द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर ऑनलाइन नगर निगम द्वारा नियुक्त आर्किटेक्ट के माध्यम से कर दिए जाते हैं इसमें बड़ी अनियमितता सामने आई है क्योंकि नक्शे ऑनलाइन पास होते हैं और भवन निरीक्षक एवं भवन अधिकारी का हस्तक्षेप इसमें नहीं होता जिसके चलते कुछ आर्किटेक्ट ने ऐसे स्थान पर नक्शे नगर निगम से पास करवा लिए जहां पर निर्माण की अनुमति ही नहीं है।
उदाहरण के तौर पर ग्रीन बेल्ट नदी किनारे बगीचे यहां तक की अवैध कॉलोनी में भी नक्शों को स्वीकृति दे दी गई। इस स्थिति में आयुक्त ने पांच आर्किटेक्ट के लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की थी वहीं इन क्षेत्र के बीओ को भी नोटिस जारी किए गए हैं।
इसके अलावा भवन अनुज्ञा शाखा में ही दूसरा बड़ा घोटाला बिल्डिंग परमिशन फीस कम भरने को लेकर हुआ है, जिसको लेकर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के निर्देश पर अपरायुक्त ने निगम के 22 भवन अधिकारियों को बीते 1 साल के नक्शे की जांच एक सप्ताह में करनी थी इसके लिए लगभग 500 नक्शे चिन्हित किए गए थे जिनकी जांच की जानी थी लेकिन एक सप्ताह बाद भी यह जांच शुरू नहीं हुई है मतलब अपर आयुक्त के आदेश को ही भवन अधिकारियों ने हवा में उड़ा दिया। यह जांच आपस में भवन अधिकारियों को एक दूसरे के जोन क्षेत्र में करनी थी मतलब जो जिस क्षेत्र में नियुक्त है वहां की जांच करने की बजाय उसे दूसरे जोन क्षेत्र के नक्शों की जांच करने का काम दिया गया था।
इसके अलावा नगर निगम में फर्जी नामांतरण घोटाले की जांच जारी है। नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच के लिए भोपाल ई नगर पालिका से कंप्यूटर्स के आईपी एड्रेस मांगे गए थे वहां से जानकारी मिली है लेकिन वह जांच के लिए पर्याप्त नहीं है इसीलिए हमने पुनः रिमाइंडर नगर पालिका पोर्टल को डाला है इसके बाद अब विस्तृत जानकारी मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा राजस्व विभाग के अपर आयुक्त इस मामले में पीड़ितों से क्रॉस वेरिफिकेशन का काम जल्द शुरू करने वाले हैं।
354 नामांतरण किए गए हैं इसमें उन लोगों का आमना सामना करवाया जा रहा है जिनके नाम पहले से ही नामांतरण था और जिनके नाम हाल ही में चढ़ाए गए हैं इससे यह पता चलेगा कि किसके इशारे पर और कैसे फर्जीवाडे को अंजाम दिया गया है। जांच पूरी होने के बाद इस मामले में दोषियों पर एफआईआर दर्ज करवाने की कार्रवाई की जाएगी।
