इंदौर में पीडब्ल्यूडी की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल: कई बड़े प्रोजेक्ट हो रहे लेट
लोक निर्माण विभाग की कार्य शैली पर सवाल उठ रहे हैं। कई बड़े प्रोजेक्ट इंदौर शहर में लंबे समय से लेट लतीफी के शिकार हो रहे हैं। मुख्य रूप से पिपलियाहाना क्षेत्र में स्कीम 140 रोड पर लंबे समय से साल 2017 से बन रही कोर्ट बिल्डिंग का काम 9 साल बाद भी अधूरा है।
हालात यह है कि काम की रफ्तार देख कर लगता नहीं कि करीब 626 करोड़ से ज्यादा लागत वाली लंबी चौड़ी बड़े बजट वाली कोर्ट बिल्डिंग का काम इस साल के अंत तक भी पूरा नहीं हो पाएगा। क्योंकि लंबे समय से चल रहे नवीन बिल्डिंग निर्माण कार्य में इतने सालों में कई बार उतार-चढ़ाव आए। जिसमें पहले लगातार देरी के लिए जिम्मेदार ठेकदार कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर पुरानी ठेकेदार एजेंसी बदलने के अलावा कोविड महामारी से देरी से लेकर कई बार ड्राइंग और डिजाइन तक बदलने से भी देरी हुई।
इसके अलावा काम लंबा खींच जाने के और भी कई कारण रहे। जिनमें बार-बार टेंडर बदलने जैसी प्रशासनिक और वित्तीय बाधाएं भी आई। ठेकेदारों का काम छोड़ना, पुराने ठेकेदार के जेल जाने के बाद टेंडर प्रक्रिया में बदलाव कर काम और बजट बढ़ने से लेकर लागत बढ़ जाने के बाद दोबारा नए सिरे काम शुरू होने के बाद भी अभी तक ऱफ्तार नहीं पकड़ पाया।
जिसके कारण काम अभी भी अधूरा है। जबकि अब तक तो नौ मंजिला बिल्डिंग बनकर तैयार भी हो जाना थी।
अफसरों ने किए थे कई दावें- जबकि अफसरों द्वारा
दावे किए गए थे कि करोड़ों लागत वाली नई कोर्ट बिल्डिंग सेंट्रल इंडिया की सबसे बेहतरीन बिल्डिंग होगी। जहां वकीलों के लिए 800 चेंबर बनाने का दावा भी किया गया। एक ही परिसर में सारी व्यवस्थाओं को जुटाने का दावा भी किया गया था।
नया परिसर पूरी तरह से हरियाली से भरा हुआ होगा। साथ ही बारिश के एक-एक बूंद को जमीन के भीतर उतरने का सिस्टम भी बिल्डिंग में चारों तरफ लगाए जाने का दावा किया गया था। 2 साल पहले 234 करोड रुपए का बजट बढ़ाने के बाद भी टोटल लागत 626 करोड रुपए हो जाने के बाद भी अभी तक काम अधूरा है।
अफसर कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है कि कब काम पूरा होगा। पीडब्ल्यूडी और उसके विभाग द्वारा लगातार किए जा रहे काम लेट लतीफी के शिकार हो रहे हैं। समय सीमा निकलने के इतने समय बाद भी अब काम कब तक पूरा होगा यह भी कोई जिम्मेदार अधिकारी बताने को तैयार नहीं है।
