केशरी वाटिका में 9 दिनों तक नवकार की आराधना होगी
केशरी वाटिका में विराजित आचार्य नित्यसेनसूरीश्वर म.सा. की निश्रा में आयोजित धर्मसभा में बुधवार को नवकार महामंत्र की महिमा, संस्कारों के महत्व, समय के सदुपयोग एवं आत्मपरिवर्तन पर प्रेरणादायी प्रवचन हुए। धर्मसभा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। गुरुदेव ने नवकार महामंत्र की विशेष आराधना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आगामी नौ दिनों तक नवकार महामंत्र के 68 अक्षरों से संबंधित 68 तीर्थों की भावयात्रा कराई जाएगी।
‘अडसठ अक्षर, एणा जाणो अडसठ तीरथ’ के भाव के साथ प्रतिदिन नवकार के एक-एक पद पर चिंतन, मनन एवं भावयात्रा होगी। धर्मसभा में चोला में बैठे 54 तपस्वियों का उपवास, गुरुराज द्विशताब्दी तप में 36 भाई-बहनों की आराधना तथा विभिन्न तपस्वियों की तपश्चर्या जारी रही। चंदनबाला जितेंद्र बडेरा के 31 उपवास, जयंतीलाल वेद के 22 उपवास, साध्वीवर्या बालसाध्वी राजर्षिलताश्रीजी के 21 उपवास एवं पूर्वी मुथा के 18 उपवास सहित विभिन्न तप के अभी तक 100 से ज्यादा तपस्वी की आराधनाएं चल रही हैं।
राजेश जैन युवा, महेन्द्र बागवाला, नीरज सुराणा, धनराज संघवी, हिम्मत संघवी, महेशजी पीपाड़ा, हीरालाल बाफना, मुकेश नाकोडा ने अपनी भूमिका निभाई।
