अल्पसंख्यक मोर्चे की कमान के लिए अखिलेश शाह की दावेदारी
प्रदेश अध्यक्ष बनने को लेकर नए समीकरण की चर्चा
जैन समाज को करीब 12 साल पहले अल्पसंख्य का दर्जा मनमोहन सिंह सरकार ने 2014 में अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में दिया था। इन 12 सालों में कई समीकरण राजनीति में भी अल्पसंख्यक खेमे के अन्दर बदले हैं। इस बार भाजपा मुस्लिम समाज के बजाए जैन समाज से जुड़े लोगों को प्रदेश की कमान सौंपना चाह रही है, उसी कड़ी में नया सियासी समीकरण बनते दिख रहा है।
इंदौर से जुड़े अखिलेश शाह की दावेदारी प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा के मुखिया के रूप में होने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में चल रही है। शाह अपने पुराने संबंधों को भी भुनाने की जुगत में लगे हैं। भाजपा भी चाह रही है कि अल्पसंख्यक मोर्चा में जैन समाज को प्रदेश का दायित्व सौंपा जाए।
भाजपा यही चाहती है कि अल्पसंख्यक मोर्चा से केवल मुस्लिम समाज के नेताओं को ही सीमित नहीं रखा जाए, बल्कि अब जैन समाज से जुड़े नेताओं को आगे लाया जाए, जैन के बाद भाजपा की रणनीति यही है कि सिख समाज और अन्य अल्पसंख्यक समाज को आगे किया जाए। अभी इसी कड़ी में भाजपा जैन समाज को प्रदेश स्तर पर कमान देने की योजना के समीकरण में अब अखिलेश शाह की दावेदारी मजबूत दिखाई दे रही है। उल्लेखनीय है कि वक्फ बोर्ड में सनव्वर पटेल की नियुक्ति फिर से हुई है, इसलिए अब अल्पसंख्यक मोर्चा में जैन की नियुक्ति के रूप में अखिलेश शाह का नाम प्रमुखता से सामने आया है।
अब देखना है कि शाह अपनी राजनीतिक उड़ान को प्रदेश तक उड़ा पाते हैं या फिर इंदौर तक ही सीमित रह पाते हैं। उम्मीद पूरी बनी है कि शाह अल्पसंख्यक मोर्चा की कमान संभाल लेंगे।
