सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

रीजनल पार्क संवारने का निगम का दावा फेल

लंबे समय से पीपीपी माडल प्रयास के बावजूद नहीं मिल रही सफलता 15 साल से ज्यादा पुराने पार्क की लगातार बिगड़ रही सूरत

रीजनल पार्क को संवारने के लिए निगम द्वारा लंबे समय से किए जा रहे हैं प्रयास और दावे अब फेल होते नजर आ रहे हैं। हालत यह है कि कई बार टेंडर प्रक्रिया के बाद पीपीपी मॉडल पर काम शुरू करवाने के लिए लगातार प्रयास के बावजूद सफलता नहीं मिल रही है। इधर 15 साल से ज्यादा पुराने पार्क की लगातार हालत बिगड़ रही है।

इतने बड़े रीजनल पार्क में ना बच्चों के लिए मनोरंजन की व्यवस्था है, और ना ढंग की बैठक व्यवस्था है और न ही ठीक से खाने-पीने की व्यवस्था है। यही नहीं मनोरंजन के लिए भी लोगों के लिए कोई साधन - संसाधन मौजूद नहीं है। जबकि निगम पिछले कई सालों से अटल बिहारी वाजपई उद्यान को निजी हाथों में सौंप कर यहां मनोरंजन और विकास कार्य शुरू करने के दावे कर रहा है लेकिन उसे सफलता नहीं मिल रही है।

वहीं बड़ी बात यह है कि यहां हालत इतनी खराब है कि पार्क में जगह-जगह टाइल्स टूटी पड़ी है। यही नहीं शाम के समय पूरे पार्क में अंधेरा ही अंधेरा नजर आता है। जिसका कारण यह है कि पार्क में लंबे समय से आधी से ज्यादा सजावटी लाइटिंग पिछले कई महीनो से बंद पड़ी हुई है।

जिनमें आधी से ज्यादा लाइटिंग खराब हो रही है और आधी से ज्यादा लाइटिंग टूट फूट गई है। यही नई सुरक्षा गार्ड्स की संख्या भी कम हो गई है। इतने बड़े पार्क को संभालने के लिए गिनती के सुरक्षा गार्ड है। यही नहीं अब यहां दर्शकों की संख्या भी लगातार घट रही है।

लोगों का कहना है कि 25 रु. टिकट शुल्क होने के बाद भी मनोरंजन के कोई साधन नहीं है। इतना बड़ा पार्क में न अप्पू घर है और ना बोटिंग की सुविधा और ना ढंग की बैठक व्यवस्था है। जिससे अब चुनिंदा लोग ही मजबूरी में यहां आते हैं। ज्यादातर समय तो यहां लडके-लड़कियां प्रेमी जोड़े ही बैठे रहते हैं इसलिए यहां कोई परिवार वाले तो आना पसंद ही नहीं करते हैं।