सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

6 करोड़ जमा कराने के बाद भी योजना-171 मुक्त नहीं

सदस्य बोले-10 दिन इंतजार, नहीं तो आरपार का प्राधिकरण के खिलाफ आंदोलन

इन्दौर (सिटी

न.प्र.)। इंदौर विकास प्राधिकरण की 33 वर्षों से लंबित योजना क्रमांक-171 पूर्व योजना-132 को लेकर प्रभावित सहकारी संस्थाओं, भू- स्वामियों और प्लॉटधारकों का आक्रोश अब खुलकर दिखाई देने लगा है। सैकडों की तादाद में सदस्यों का गुस्सा दिखा और कहा कि 33 सालों से इंतजार किया जा रहा है जो अब आईडीए की लगातार वादाखिलाफी के खिलाफ इंतजार असहनीय हो रहा है। सैकडों की तादाद में सदस्य बोले 10 दिन में फैसला नहीं तो होगा आर-पार का जनआंदोलन होगा।

ब्लास्ट

उल्लेखनीय है कि 13 सहकारी संस्थाओं के 6,000 सदस्य और 200 से अधिक भूमि स्वामी रविवार को योजना क्षेत्र स्थित पुष्पविहार कॉलोनी में एकत्र हुए और आईडीए तथा प्रदेश शासन पर वादाखिलाफी, प्रशासनिक उदासीनता और कानूनी प्रावधानों की अनदेखी का आरोप लगाया। प्रभावितों ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि 10 दिनों के भीतर योजना को मुक्त करने का आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया, तो हजारों परिवारों के साथ व्यापक जन आंदोलन छेड़ा जाएगा। सभा में बड़ी संख्या में मौजूद महिलाओं और पुरुषों ने कहा कि तीन दशक से अधिक समय से लंबित इस योजना ने हजारों परिवारों का अपना घर बनाने का सपना अधूरा छोड़ दिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि आईडीए की ढुलमुल कार्यप्रणाली के कारण लोग मानसिक, आर्थिक और सामाजिक संकट झेलने को मजबूर हैं। योजना क्रमांक- 171 पुष्पविहार कॉलोनी प्लॉटधारक समूह के महासचिव एन.के. मिश्रा ने कहा कि पिछले 33 वर्षों में हजारों लोगों ने अपनी जीवनभर की कमाई से प्लॉट खरीदे और योजना को मुक्त कराने के लिए एक-एक रुपया जोड़कर करीब 6 करोड़ आईडीए में जमा कराए। इसके बावजूद आज तक उन्हें अपने ही प्लॉट पर निर्माण की अनुमति नहीं मिल सकी।

उन्होंने कहा कि कई प्लॉटधारक न्याय की प्रतीक्षा करते-करते इस दुनिया से चले गए, जबकि अनेक सदस्य अब जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1993 में लागू योजना क्रमांक- 132 को निर्धारित समय में विकास कार्य पूरे नहीं होने के कारण हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था। इसके बाद वर्ष 2009 में उसी क्षेत्र में योजना क्रमांक- 171 लागू की गई, लेकिन आज तक न तो भूमि का अधिग्रहण किया गया और न ही कोई विकास कार्य शुरू हुआ।

परिणामस्वरूप हजारों प्लॉटधारक अपने वैध भूखंडों पर मकान बनाने से वंचित हैं। प्रभावितों ने आरोप लगाया कि वर्षों तक योजना लंबित रहने का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों ने कई प्लॉटों पर अवैध कब्जे कर निर्माण कर दिए और उन्हें बेच भी दिया, जबकि वास्तविक सदस्य न्याय के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहे।