सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

संपादकीय शाहजहांपुर के पार्षदों के वीडियो ने उठाए सवाल, भ्रष्टाचार की कमाई बांटने की शपथ क्यों? इ

सभी के बीच बराबर बांटा जाएगा। भ्रष्टाचार एक ऐसी दीमक है, जो किसी भी देश, समाज और उसकी व्यवस्था को अंदर से पूरी तरह खोखला कर देती है। इसका सबसे ज्यादा असर समाज के गरीब, वंचित और उस जरूरतमंद वर्ग पर पड़ता है, जिसे अपने जीवन में हर मोड़ पर संघर्ष करना पड़ता है।

इससे एक ऐसी अराजकता पैदा होती है, जो सीधे तौर पर नजर नहीं आती, लेकिन वह व्यवस्थागत प्रणाली को पंगु कर देती है। कहने को केंद्र और राज्य सरकारें भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति पर अमल कर रही हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में नगर निगम के पार्षदों से जुड़ा एक वीडियो कुछ और ही हकीकत बयान करता है। खबरों के मुताबिक, इस वीडियो में पार्षद हाथ में जल लेकर यह शपथ लेते नजर आ रहे हैं कि नगर निगम से होने वाली आय को सभी के बीच बराबर बांटा जाएगा।

इस मामले में कार्रवाई को लेकर गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि संबंधित राजनीतिक दल और महापौर की ओर से इन पार्षदों को सिर्फ कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद सड़क से सियासी गलियारों तक कई सवाल उठ रहे हैं। आखिर ये पार्षद नगर निगम की किस आय के बंटवारे की बात कर रहे थे।

क्या ऐसी कोई व्यवस्था है कि किसी स्थानीय निकाय की आमदनी को जनप्रतिनिधियों में बांटा जाता है! विपक्षी दल इस मामले पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका दावा है कि वीडियो में पार्षद भ्रष्टाचार से होने वाली कमाई के बंटवारे की बात कर रहे थे।

इस पर संबंधित जिलाधिकारी का यह बयान और भी विचित्र है कि इस मामले में अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है, जिसके आधार पर जांच कराई जा सके। ऐसे में सवाल है कि किसी सार्वजनिक मंच पर प्रचारित हुए वीडियो के आधार पर क्या प्रशासन की ओर से स्वत: संज्ञान नहीं लिया जा सकता? दूसरा, भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था का दावा करने वाली राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस मामले में दखल क्यों नहीं दिया गया?

जाहिर है कि सिर्फ दावों और घोषणाओं से भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा, जरूरत इसकी जड़ों पर प्रहार करने की है।