सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

नवकार महामंत्र की भावयात्रा से अष्टापद तीर्थ का आध्यात्मिक दर्शन

केशरी वाटिका में चल रहे चातुर्मास के अंतर्गत आचार्य नित्यसेनसूरीश्वर म.सा. ने नवकार महामंत्र के 68 अक्षरों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। आचार्य ने कहा कि नवकार महामंत्र केवल मंत्रोच्चार नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, विनय और कर्मनिर्जरा की दिव्य साधना है। जब व्यक्ति के भीतर विनय और सरलता आती है, तभी वह नवकार की वास्तविक शक्ति का अनुभव कर सकता है।

आचार्य ने नवकार महामंत्र की भावयात्रा के माध्यम से श्रद्धालुओं को अष्टापद तीर्थ का आध्यात्मिक दर्शन कराया। उन्होंने भगवान आदिनाथ एवं अष्टापद तीर्थ की महिमा बताते हुए कहा कि भगवान आदिनाथ ने इसी पावन भूमि से मोक्ष प्राप्त किया था। राजेश जैन युवा ने बताया कि चातुर्मास स्थल पर तपस्वी भाई- बहनों की सिद्धि तप आराधना जारी रही।

उपवास की आराधना करने वाले तपस्वियों का अभिनंदन किया गया। सुनील राजमल कापडिया, हजारीमल कांतिलाल राका, राकेश-प्रीति जैन ने आयोजन में लाभ लिया। भेरूलाल लुणावत, जयंतिलाल बागवाला, शांतिलाल रुणवाल, विपिन जैन, नीरज सुराणा, धनराज संघवी, सुरेश- मदनलाल जैन, अक्षय मेहता सहित अन्य ने अपनी भूमिका निभाई।