आगम वाचन एवं संस्कारों पर साध्वी के प्रवचन
संकल्पमय चातुर्मास के अंतर्गत एयरपोर्ट रोड स्थित नरसिंह वाटिका में अनुष्ठान आराधिका साध्वी डॉ. कुमुदलता म.सा. के सान्निध्य में आयोजित धर्मसभा में आगम वाचन एवं संस्कारों पर प्रेरणादायी प्रवचन हुए। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धर्मसभा में उपस्थित होकर संतों की वाणी का लाभ लिया। साध्वी पद्मकीर्तीजी महाराज साहब ने निरंतर चल रहे सुखविपाक सूत्र का वाचन करते हुए सुख प्राप्ति के मार्गों और जीवन में धर्म के महत्व को समझाया।
उन्होंने आगम में वर्णित प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को बताया कि वास्तविक सुख केवल बाहरी साधनों से नहीं, बल्कि शुभ भाव, सदाचार और धर्ममय जीवन से प्राप्त होता है। साध्वी महाप्रज्ञाजी म.सा. ने अपने प्रवचन में वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली और संस्कारों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज आधुनिकता की दौड़ में हमारी भाषा, व्यवहार और पारिवारिक संस्कारों में भी काफी बदलाव देखने को मिल रहा है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले माता-पिता के लिए हमारे शब्दों में सम्मान और अपनत्व झलकता था, लेकिन आज कई बार बच्चे मां को 'मॉम' और पिता को 'डैड' कहने लगे हैं। उन्होंने हास्यपूर्ण अंदाज में कहा कि अंग्रेजी में 'डेड' का अर्थ मृत होता है, तो हमें विचार करना चाहिए कि कहीं आधुनिक भाषा और व्यवहार के नाम पर हम अपने जीवित माता-पिता को भावनात्मक रूप से तो नहीं खो रहे हैं। उक्त जानकारी प्रकाश जैन भटेवरा ने दी।
