नगर निगम में अब सब कुछ वन टाइम पासवर्ड पर निर्भर
घोटाले की संभावना को देखते हुए और साइबर सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम
नगर निगम में कई घोटाले आश्चर्यचकित कर देने वाले हो चुके हैं जिसमें अधिकांश भूमिका अधिकारियों के अधीनस्थ काम करने वाले कर्मचारी की रही है, अब तक जो कार्रवाई भी हुई है वह कार्यपालन यंत्री स्तर तक के अधिकारी पर ही हुई है इसके ऊपर के अधिकारियों पर कोई कार्रवाई या कोई आरोप भी नहीं है। अगर भागीरथपुरा मामले को छोड़ दिया जाए तो यह घोटाला नहीं यह तो केवल घटना थी लेकिन नगर निगम ने ऐसे घोटाले को रोकने के लिए अब एक और बड़ा कदम उठाया है।
फाइलों में कोई भी परिवर्तन करने से पहले संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी से ओटीपी पासवर्ड लेना होगा इसी के आधार पर परिवर्तन किया जा सकेगा।
नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने बताया वेतन घोटाले और फर्जी नामांतरण घोटाले से पहले तक वन टाइम पासवर्ड के माध्यम से काम नहीं किया जाता था जिसके कारण बड़ी अनियमिताएं हुई। सुरक्षा की दृष्टि से अब वन टाइम पासवर्ड मतलब ओटीपी को अनिवार्य कर दिया गया है साथ ही यह सिस्टम पूरे नगर निगम में लागू करने के निर्देश दिए हैं। कोई भी फाइलों में परिवर्तन संबंधित विभाग के बड़े अधिकारी के ओटीपी पासवर्ड के बगैर आगे नहीं बढ़ेगी।
वर्तमान में यह सिस्टम राजस्व विभाग में फॉलो किया जा रहा है जिसमें एक बार जोन कार्यालय से नामांतरण एवं राजस्व संबंधी प्रकरण की फाइलें ऑनलाइन होने के बाद बगैर ओटीपी पासवर्ड के नहीं खोली जा सकेगी इसके अलावा इसमें परिवर्तन के लिए भी वन टाइम पासवर्ड मांगा जा रहा है। जोन स्तर तक फाइल रहने के लिए यारों और इसके आगे एआरओ मुख्यालय की भूमिका अहम होगी। मामले में अपर आयुक्त आकाश सिंह ने भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बगैर ओटीपी के कोई काम नहीं किया जाए अगर किसी ने ऐसा करने का प्रयास किया तो नौकरी से बर्खास्तगी के लिए तैयार रहे।
विभाग में कोई भी मैन्युअल फाइल तैयार नहीं की जाएगी सभी की प्रक्रिया डिजिटल तरीके से होनी चाहिए। प्रतिदिन मुख्यालय में फाइलों की गतिविधि पर नजर रखने के लिए कर्मचारी को जिम्मेदारी दी गई है जो गोपनीय रूप से राजस्व विभाग की गतिविधियों पर नजर रखकर अपर आयुक्त को रिपोर्टिंग कर रहा है। ओटीपी का उपयोग नाम, राशि, एड्रेस, क्षेत्रफल, भुगतान जमा करने पर किया जा रहा है।
