चिंटू-पिंटू विवाद का असर जश्न में दिगाई दिया
विधानसभा 3 के गांधी भवन में ही हुआ था कार्यक्रम फिर भी नहीं पहुंचे जोशी और कई समर्थक
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निवास पर चार दिन पहले नगर निगम चुनाव को लेकर विधानसभा प्रभारियों और नगर अध्यक्ष के साथ चुनिंदा लोगों की बैठक हुई थी उस बैठक में किसी मुद्दे पर शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे और विधानसभा 3 के प्रभारी पिंटू जोशी के बीच तकरार हुई थी, जिसे विरोधियों ने बड़ा तूल देने की कोशिश भी की थी और इस मामले में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी तंज कसा है। सूत्रों का कहना है कि इसी चिंटू-पिंटू बहस का असर कल दतिया चुनाव के परिणाम के बाद कांग्रेसियों के खुशी पर भी नजर आया।
कल विधानसभा 3 के ही गांधी भवन के नीचे कांग्रेसियों ने खुशी का इजहार कर एक-दूसरे को बधाई दी। कांग्रेसी झंडा लहराया, आतिशबाजी की गई और मिठाई का वितरण भी हुआ। यहां तक कि कुछ कांग्रेसियों ढोलक की थाप पर खुशी में नृत्य भी किया।
जानकारों का कहना है कि कल भी कांग्रेस की गुटबाजी नजर आई। कुछ विधानसभा प्रभारियों के अलावा कुछ पार्षद, कुछ वरिष्ठ नेता और यहां तक कि कुछ शहर कांग्रेस पदाधिकारी, ब्लॉक और मंडलम पदाधिकारी, ब्लॉक और मंडलम के प्रभारी, महिला प्रभारी भी नजर नहीं आए। इधर विधानसभा 3 के प्रभारी पिंटू जोशी की अनुपस्थिति ने कल चार दिन पहले की बैठक की तकरार को हवा दे दी।
कांग्रेसियों का कहना था कि पहले भी विधानसभा 1 की नारजागी का असर प्रभारी से लेकर ब्लॉक और मंडलम तक दिखा था, अब यह असर विधानसभा 3 में कल नजर आया। दतिया की जीत के जश्न में प्रभारी पिंटू जोशी और कई पदाधिकारी और समर्थक नदारद रहे। सूत्रों का कहना है कि जब कार्यक्रम पूरा हुआ उसके बाद पहले से गुस्साएं बैठे कांग्रेसियों ने चिंटू चौकसे पर तंज कसा कि और बनाओ प्रभारी के कहने से पदाधिकारी।
कुछ ने कहा कि अगर ब्लॉक और मंडलम में शहर अध्यक्ष अपने समर्थक पदाधिकारी को बनाते तो यह स्थिति नहीं होती। प्रभारियों के जो विरोधी उन विधानसभाओं में हैं उन्हें पद से दूर रखा गया, जिससे वे मुकदर्शक हो गए। इधर कल कांग्रेसियों ने यह भी कहा कि कांग्रेसी इस जीत के जश्न में आना चाहते थे, उन्हें फोन कर रोका गया है, तो कुछ कांग्रेसी बोले संगठन के कार्य में भी 3 नम्बर से ठीक से सहयोग नहीं मिल रहा है।
यहां तक कि विधानसभा 3 के सभी ब्लॉक, मंडलम और संगठन के काम की सूची भी ठीक से नहीं आ रही है और फोन नम्बर भी पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं के मांगे जाते हैं तो वह भी नहीं आ रहे हैं। कांग्रेसियों ने यह भी प्रश्न उठाए कि यह सब कौन करा रहा है, इसके लिए समन्वय बैठक होना चाहिए। कांग्रेसियों ने कहा कि जब विधानसभा 3 की बैठक होती है तब भी कई पदाधिकारी अनुपस्थित रहते हैं, तो कुछ बोले कि विधानसभा 3 के ब्लॉक, मंडलम अध्यक्षों के घर पर प्रभारी ने कितने भ्रमण किए हैं।
विधानसभा 3 के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम के लिए फोन नहीं लगाए जाते हैं, यह फोन भी गांधी भवन से लगाए जाते हैं। कुल मिलाकर विधानसभा 3 के जिम्मेदारों और शहर कांग्रेस के बीच समन्वय होने की बात भी कांग्रेसियों ने कही और यह भी कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है तो कांग्रेस की बदनामी होती है और सबसे अच्छा है कि जिम्मेदारी तय कर बातचीत की जाए और सबकी नाराजगी दूर कर सबको काम में लगाया जाए। अगले वर्ष निगम चुनाव है और अब ढाई साल भी विधानसभा चुनाव में नहीं बचे हैं इसलिए गुटबाजी पूरी तरह समाप्त की जाए। वरिष्ठ नेताओं को बैठाकर बातचीत की जाए।
