सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

निगम के सेल्फी अभियान से जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे दूर

निगम ने बनाया 5 लाख सेल्फी लेने का वर्ल्ड रिकॉर्ड लोगों ने सेल्फी नहीं ली तो गाड़ी के साथ चल रहे एनजीओ कर्मचारी ने अपने कैमरे से फोटो लेकर कर दी अपलोड

नगर निगम ने गुरुवार को सफाई अपनाओ बीमारी भगाओ अभियान के तहत नागरिकों द्वारा कचरा सेग्रीगेशन करने वाली 5 लाख से अधिक सेल्फी लेने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया, लेकिन इस अभियान से शहर के विधायक मंत्री और पार्षदों ने ही दूरी बना ली। ऐसा लगा अभियान केवल इंदौर नगर निगम महापौर और निगम आयुक्त एवं एनजीओ का ही है। इस अभियान में नगर निगम के 85 पार्षदों का उत्साह भी दिखाई नहीं दिया।

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने निगम के इस अभियान को लेकर सवाल खड़े करना शुरू कर दिए। उन्होंने महापौर से डोर टू डोर कचरा कलेक्शन सिस्टम अपडेट करने और खाली प्लाट पर फैली गंदगी को साफ करने के बाद सफाई वाली सेल्फी लेने का आग्रह किया। अभियान की स्थिति यह रही की स्वयं लोगों ने तो सेल्फी नहीं ली लेकिन एनजीओ के कर्मचारियों ने कचरा डालते वक्त लोगों की फोटो लेकर पोर्टल पर अपडेट कर दी जिससे यह रिकॉर्ड कायम हो गया।

एनजीओ के कर्मचारी जो कभी कचरा गाड़ी के साथ दिखाई नहीं देते वह कल कचरा गाड़ी के साथ में चल रहे थे। वहीं दूसरी और आम नागरिकों की ओर से अभियान को लेकर मिली जुली प्रतिक्रिया आई। लोगों का कहना था कि शहर में सफाई की मॉनिटरिंग होना अब बंद हो चुकी है इसीलिए खाली प्लाटों पर फैल रही गंदगी शहर को बदनाम कर रही है इसके लिए कोई सिस्टम तैयार होना चाहिए।

पिछले 5 सालों में स्वच्छता का सिस्टम वही है कोई बड़ा परिवर्तन नहीं किया गया है, सबसे अधिक जरूरी लोगों का खुले में कचरा फेंकना बंद करना है।

गीता भवन क्षेत्र में रहने वाली सारिका सिंह ने बताया कि शहर में गंदगी अब आसानी से दिखाई देने लगी है। नगर निगम द्वारा सख्ती नहीं किए जाने के कारण यह स्थिति बन रही है। गली मोहल्ला, फुटपाथ, ग्रीन बेल्ट, खाली प्लाट पर कचरा फैला रहता है।

लोगों को अब खुले में कचरा फेंकने का डर नहीं रहा लोग आसानी से कचरा खुले में डाल जाते हैं। शिकायत करने वालों को धमकाया जाता है, नगर निगम में गोपनीय शिकायत करने का सिस्टम नहीं है। वही सुदामा नगर में रहने वाले दीपक मिश्रा बताते हैं कि नगर निगम को अपना सिस्टम चेंज करना चाहिए, पिछले 16 सालों से सिस्टम में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।

नगर निगम के एनजीओ को जो जिम्मेदारियां दी गई थी वह पूरी नहीं हो रही है। कचरा गाड़ी के साथ एक एनजीओ कर्मचारी का रहना आवश्यक है जो सफाई के साथ खुले प्लाटों पर पहले गंदगी की डे टुडे मॉनिटरिंग करें और उनका साफ करवाने के लिए प्लाट मालिकों से वसूली जाए।

इसके अलावा उन्होंने बताया कि नगर निगम कचरा गाड़ी के साथ हेल्पर कचरा गाड़ी में नहीं डालते जबकि 2016 में जब सिस्टम तैयार किया गया था तब लोगों को अपना कचरा केवल घर से बाहर निकालना था और निगम के हेल्पर की ड्याूटी डस्टबिन लेकर गाड़ी में कचरा डालना थी लेकिन कोई भी हेल्पर कचरा गाड़ी में नहीं डाल रहा है। डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की राशि लोगों से वसूली जा रही है लेकिन सुविधा नहीं दी जा रही है इसीलिए लोगों में नाराजगी भी दिखाई दे रही है।

निगम और एनजीओ के कर्मचारी अपनी ड्रेस में नहीं होते, ना ही अपना आइडेंटिटी कार्ड लगाते हैं। रहवासियों का बाहर रखा कचरा उठाने पर ऐतराज जताते हैं।