सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

वैध कॉलोनी को अनुमति देने की प्रक्रिया हो गई लंबी

पूर्व शाखा प्रभारी की अपर कलेक्टर से हो चुकी है बहस

फाइल लगाने के बाद परेशान हो जाते हैं कॉलोनाइजर

ग्रामीण क्षेत्र में वैध कॉलोनी के विकास की प्रक्रिया लंबी हो गई है। कलेक्टर कार्यालय में फाइल अटक जाने के कारण कॉलोनाइजर परेशान हो जाते हैं। कलेक्टर कार्यालय के कॉलोनी सेल को लेकर एक बार फिर अचंभित कर देने वाली स्थिति बन गई है।

जहां एक ओर शासन और जिला प्रशासन अवैध कालोनियों को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। कलेक्टर शिवम वर्मा भी अवैध कॉलोनी पर कार्रवाई के निर्देश दे चुके हैं। वही वैध कॉलोनी विकसित करना मुश्किल और महंगा होता जा रहा है। रेड क्रॉस निधि में लाखों रुपए जमा करने के बाद भी जिम्मेदार फाइल को अपने मतलब के लिए रोक कर बैठे हैं।

जिसके कारण कॉलोनाइजर कार्यालय के चक्कर लगाते नजर आते हैं। वैध कॉलोनी में आने वाली परेशानियों को देखते हुए लोग आसानी से अवैध कॉलोनी विकसित कर लेते हैं। इसमें उन्हें सिर्फ जमीन का उपयोग बदलना है तथा नगर एवं ग्राम निवेश से नक्शा स्वीकृत करवाकर लोगों को छोटे- छोटे भूखंड नोटरी या रजिस्ट्री के माध्यम से विक्रय करना होता है जिसमें उन्हें परेशानी नहीं होती है।

पूर्व कलेक्टर मनीष सिंह कॉलोनाइजरों की परेशानी दूर करने के लिए जिले में अलग से कॉलोनी से विकसित कर एक एसडीएम और एक अपर कलेक्टर को इसकी जिम्मेदारी दी थी। किंतु वर्तमान में यह जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी काम करने की बजाय अपना मतलब साधने में लगे नजर आते हैं। कॉलोनी सेल में एक कालोनी विकसित करने से पूर्व लाइसेंस के लिए रेड क्रॉस निधि में 2 लाख रूपए, विकास अनुमति के लिए 2 लाख रुपए और पूर्णता प्रमाण पत्र के लिए 2 लाख रुपए इस तरह एक ही कॉलोनी के लिए रेड क्रॉस निधि में 6 लाख रुपए जमा किए जाते हैं।

लाइसेंस तो आसानी से मिल जाता है किंतु विकास अनुमति के समय अधिकारियों की नजर कॉलोनी पर रहती है। इस समय कॉलोनी सेल के माध्यम से विज्ञप्ति प्रकाशन के बाद फाइलों को आगे बढ़ाया जाता है किंतु फाइल अपर कलेक्टर कार्यालय में लंबे समय तक अटकी रहती है। कालोनाइजरों का कहना है कि विकास अनुमति से पूर्व होने वाले प्रेजेंटेशन के तुरंत बाद सब की जेब गर्म करना जरूरी है।

यदि उन्हें मनमानी राशि नहीं दी गई तो विकास अनुमति के लिए कार्यालय के चक्कर काटना होंगे। अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य इस तरह की कई फाइलों को रोक कर बैठे हैं। उनका कहना है कि विकास अनुमति जारी करने से पहले शाखा से पहले आगे बढ़ाने के बाद अपर कलेक्टर न्यायालय में फाइल उलझने को लेकर पूर्व शाखा प्रभारी एसडीएम प्रदीप सोनी की अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य से बहस हो चुकी है।

यह बात प्रशासनिक कार्यालय में लंबे समय तक चर्चा का विषय रही थी। बताया जाता है कि उस समय भी पूर्ण फाइलों को अपर कलेक्टर ने अपने कार्यालय में लंबे समय तक रोक कर रखा था जिसके कारण शाखा प्रभारी को बार-बार कलेक्टर से फटकार का सामना करना पड़ रहा था।

अलग-अलग कॉलोनियों के लिए निर्धारित है अलग-अलग दर

बताया जाता है कि अपर कलेक्टर के कार्यालय में विकास अनुमति के लिए अलग-अलग क्षेत्र की कॉलोनी के लिए अलग-अलग निर्धारित की गई है। निर्धारित राशि उन तक पहुंचाने के बाद ही तुरंत विकास अनुमति जारी हो जाती है। 1माह पहले जिन कॉलोनी को लेकर प्रेजेंटेशन हुआ उनमें से अधिकांश पूर्ण हो चुकी है किंतु अपर कलेक्टर ने अभी तक उक्त कॉलोनी की विकास अनुमति जारी नहीं की है।

शाखा प्रभारी से चर्चा जरूरी है। अनुमति के लिए फाइल सिर्फ उनके जबकि शाखा प्रभारी प्रेजेंटेशन से पूर्व माध्यम से आदेश जारी होने के लिए ही सभी चर्चा कर चुके हैं और सारी भेजी जाती है। जिसमें भी एक महीने कमियां दूर होने के बाद ही विकास का समय लग रहा है।