सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

नामांतरण घोटाले की कड़ियों को आईटी विशेषज्ञों के साथ जोड़ने की कोशिश

निगम अधिकारियों का दावा, किसी भी दोषी को बचने नहीं देंगे

नगर निगम के द्वारा नामांतरण घोटाले की कड़ियों को आईटी विशेषज्ञों के साथ मिलकर जोड़ने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि इस घोटाले में किसी भी दोषी को बचने नहीं दिया जाएगा। निगम के तीन अपर आयुक्त आकाश सिंह, अर्थ जैन और दरवाई की टीम के द्वारा मिलकर इस नामांतरण घोटाले की जांच की जा रही है।

इस टीम का गठन निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के द्वारा किया गया है। इस टीम ने इस घोटाले को आईटी के माध्यम से पकड़ने की कोशिश शुरू की है। इसके लिए राज्य सरकार के द्वारा नगर निगम को दो विशेषज्ञ उपलब्ध कराए गए हैं। इन विशेषज्ञों की देखरेख में ही अब घोटाले की जांच को गति दी जा रही है।

इस जांच को तेज कर दिया गया है। अभी 2 दिन पहले ही नगर निगम आयुक्त के द्वारा निगम के राजस्व विभाग से उपायुक्त सगर को हटा दिया गया और उनके स्थान पर नई नगर निगम में पदस्थ की गई गरिमा पाटीदार को इस विभाग की जिम्मेदारी दे दी गई है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस परिवर्तन को भी नामांतरण घोटाले की जांच में प्रगति लाने के लिए किया गया है।

अपर आयुक्त आकाश सिंह के द्वारा हर दिन इस घोटाले के माध्यम से लाभ अर्जित करने वाले कुछ लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है और उनसे यह जानकारी एकत्र करने की कोशिश की जा रही है कि आखिर उन्होंने यह काम निगम के किस अधिकारी या कर्मचारी के माध्यम से करवाया है। उक्त अपर आयुक्त ने बताया कि अब तक की जांच में कई लोगों के नाम सामने आ गए हैं। जिनके नाम सामने आए हैं अभी उन्हें नहीं बुलाया गया है।

अब तक यह जांच जिस दिशा में चल रही है उस दिशा को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट है कि नगर निगम के द्वारा इस घोटाले के मामले में किसी भी आरोपी को बचने नहीं दिया जाएगा।