खाली जमीन और पटरियों का टैक्स निगम को नहीं मिलेगा, मेट्रो की डिमांड कम किया जाए टैक्स
निगम अधिकारी बोले नियम और प्रावधानों के तहत ही होगी शुल्क की गणना
नगर निगम द्वारा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को सेवा प्रभार शुल्क के रूप में 8.50 करोड़ रुपये की मांग भेजे जाने के बाद मामला नए मोड़ पर पहुंच गया है। कॉरपोरेशन ने इस मांग पर आपत्ति जताते हुए संयुक्त नपती (संयुक्त मापन) की मांग की थी। इसके बाद नगर निगम और मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के अधिकारियों की मौजूदगी में मेट्रो डिपो और स्टेशन परिसरों का दोबारा सर्वे और मापन किया गया।
संयुक्त नपती के दौरान यह सामने आया कि नगर निगम ने सेवा प्रभार शुल्क की गणना में डिपो की खाली जमीन और उन हिस्सों को भी शामिल कर लिया था, जहां केवल मेट्रो की पटरियां बिछी हुई हैं। मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने इस पर स्पष्ट आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि सेवा प्रभार शुल्क केवल आरसीसी निर्मित भवनों, स्टेशन संरचनाओं और मेट्रो शेड जैसे निर्मित क्षेत्रों पर ही लगाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि खाली जमीन और पटरियों वाले क्षेत्र पर किसी प्रकार का सेवा प्रभार शुल्क नहीं लगाया जाना चाहिए, इसलिए इन्हें गणना से बाहर रखा जाए।
इसी प्रक्रिया के तहत मेट्रो स्टेशनों का भी दोबारा मापन किया गया। मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने बताया कि संयुक्त नपती के बाद ऐसे सभी क्षेत्रों की पहचान कर ली गई है, जहां नियमों के अनुसार सेवा प्रभार शुल्क लागू नहीं होना चाहिए। अब इन क्षेत्रों को कुल क्षेत्रफल से हटाने का अनुरोध नगर निगम से किया गया है।
इसके बाद संशोधित गणना के आधार पर जो भी अंतिम राशि तय होगी, उसका भुगतान मेट्रो रेल कॉरपोरेशन द्वारा नगर निगम को किया जाएगा। नगर निगम के अपर आयुक्त आकाश सिंह ने बताया कि मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को पहली बार सेवा प्रभार शुल्क की मांग भेजी गई थी। कॉरपोरेशन की आपत्ति के बाद दोनों पक्षों के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से स्थल का निरीक्षण और मापन किया है।
उन्होंने कहा कि मेट्रो का पक्ष है कि खाली भूमि और पटरियों के क्षेत्र को सेवा प्रभार शुल्क की गणना से बाहर रखा जाए। अब इस संबंध में प्रचलित नियमों और प्रावधानों का परीक्षण किया जाएगा। यदि नियम इसकी अनुमति देते हैं तो केवल पात्र निर्मित क्षेत्र को आधार मानकर सेवा प्रभार शुल्क की नई गणना की जाएगी।
संशोधित क्षेत्रफल के आधार पर अंतिम मांग पत्र तैयार किया जाएगा और उसी के अनुसार शुल्क वसूला जाएगा।
