कम्पन और आवाज का अहसास होगा कम
जमीन से 120 फीट नीचे कैसे सुरंग बनेगी, क्या इसके लिए ऊपर बने मकान, इमारत पर असर होगा। ऐसे प्रश्न शहरवासियों के बीच चर्चा का विषय बने हुए थे। दूसरा ड्रील मशीन से हो रही आवाज और कम्पन के कारण मेट्रो स्टेशन के आसपास रहने वाले लोग परेशान हो रहे हैं। उन लोगों को लग रहा है कि सुरंग होगी तो परेशानी बढ़ेगी जबकि टीबीएम मशीन से
लिए अपना जीवन यापन करना मुश्किल हो रहा है। इंदौर उन शहरों में शामिल है जहां पर की बारिश या तो हो ही नहीं रही है या फिर बिल्कुल कम ऐसी हो रही है जिससे कोई फर्क नहीं आवाज और कम्पन होती है, लेकिन 120 फीट नीचे होने के कारण इसका अहसास कम होता है। मशीन में आगे कटरहेड लगा होता है,
जिससे सुरंग खोदने में आसानी होती है।
लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण गर्मी में बंद हो चुके बोरिंग अभी भी बंद पड़े हैं। ऐसी स्थिति में जल आपूर्ति की व्यवस्था को बनाए रखने के लिए नगर निगम किसी भी हालत में यह सारे टैंकर बंद नहीं कर सकता है। निगम भी चिंता में है कि तेज पानी गिर जाए और सारे बोरिंग शुरू हो जाए तो उसे टैंकर बंद करने में आसानी होगी।
रुक गया पौधारोपण- बारिश के
ना गिरने के कारण पौधारोपण का अभियान भी रोकना पड़ा है। यदि अभी पौधा लगा देते हैं और फिर बारिश नहीं होती है तो यह पौधा जिंदा नहीं रह पाएगा। ऐसे में जो पौधारोपण किया गया है वह मतलब का साबित हो जाएगा। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही अभी पौधा रोपण के कार्यक्रम के आयोजन पर भी ब्रेक लगा दिया गया है।
प्रदेश के पहले डबल डेकर ब्रिज की एक लेन से यातायात शुरू
पड़ता है। इसके साथ ही वहां पर सुबह से लेकर रात तक बार-बार ट्रैफिक जाम हो जाता है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही प्राधिकरण के द्वारा डबल डेकर ब्रिज की एक लेन पर ट्रायल के रूप में वाहनों को आने-जाने की अनुमति आज से दी गई है।
इस लेन का पिछले दिनों लोड टेस्ट भी करवाया जा चुका है। अब अरविंदो अस्पताल की तरफ से वाहन चालक अपने वाहन को लेकर ब्रिज पर चढ़कर मरीमाता चौराहा की तरफ जा सकेंगे। यह सुविधा मिलने से सर्विस रोड पर यातायात का दबाव कम हो जाएगा। ऐसे में इस क्षेत्र में यातायात की स्थिति
ध्यान रहे कि प्राधिकरण के द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी अहिरवार के कार्यकाल के दौरान इस ब्रिज के निर्माण के प्रोजेक्ट को मंजूर किया गया था और उनके कार्यकाल में ही इस ब्रिज के निर्माण का अधिकांश कार्य भी पूरा हो गया था। उनके द्वारा करीब करीब हर दिन मौके पर जाकर निर्माण की स्थिति का आकलन किया जाता था। लगातार मॉनिटरिंग का ही यह परिणाम था कि यह काम उनके कार्यकाल में समय पर और खास तौर पर समय से पहले चल रहा था। में सुधार आएगा।
