फिश एक्वेरियम बनाने के लिए निगम को नहीं मिल रही है एजेंसी
प्राणी संग्रहालय में पीपीपी मॉडल पर 30 साल के लिए ठेके पर देने की योजना
नगर निगम को प्राणी संग्रहालय में फिश एक्वेरियम बनाने के लिए एजेंसी नहीं मिल पा रही है। निगम इस प्रोजेक्ट को पीपीपी मॉडल पर बनवाना चाहता है। बनाने वाली एजेंसी को ही इसके 30 साल के लिए संचालन का कार्य भी सौंपना चाहता है। निगम के द्वारा यह योजना तैयार की गई थी की चिड़ियाघर में फिश एक्वेरियम का निर्माण किया जाए।
इस एक्वेरियम का निर्माण हो जाने से चिड़ियाघर में आने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों को एक और अच्छी सौगात मिल जाएगी। इस सौगात के कारण चिड़ियाघर में आने वालों की संख्या में भी जोरदार वृद्धि हो जाएगी। इस आशय से निगम के द्वारा फिश एक्वेरियम के लिए योजना तैयार कर इस योजना का क्रियान्वयन पीपीपी मॉडल पर करने का फैसला लिया गया था।
इस बारे में नगर निगम के द्वारा मंजूर किए गए प्रस्ताव में कहा गया था कि पीपीपी मॉडल पर फिश एक्वेरियम के निर्माण का ठेका दिया जाएगा। इस एक्वेरियम का निर्माण 1 साल की अवधि में संबंधित एजेंसी को करना होगा। इसके बाद में 29 साल तक इस एक्वेरियम का संचालन संधारण करने का कार्य भी यह एजेंसी ही करेगी।
इस दौरान जो लोग इस एक्वेरियम को देखने के लिए आएंगे उन लोगों से अलग से शुल्क लिया जाएगा। इस शुल्क की वसूली के माध्यम से एजेंसी के द्वारा निर्माण के कार्य में लगाई गई अपनी लागत और प्रॉफिट को निकाला जाएगा। नगर निगम के इस फार्मूले पर काम करने के लिए अभी तक कोई एजेंसी नहीं मिल सकी है।
निगम के द्वारा अभी तक दो बार एजेंसी को निमंत्रित करने के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं। इन दोनों बार में एक भी एजेंसी के द्वारा इस काम को करने में रुचि नहीं ली गई है। अब तीसरी बार टेंडर जारी करने का निगम इस कोशिश में लगा है कि कोई ना कोई एजेंसी तो आ जाए और इस काम को अपने हाथ में ले ले।
तीसरी बार की इस कोशिश का परिणाम क्या निकलेगा यह तो समय बताएगा लेकिन अभी तक के हालात तो अच्छे नजर नहीं आ रहे हैं।
