सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

प्रशासन का नजूल की रजिस्ट्रियों में कारनामा

म.प्र. कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता एडव्होकेट प्रमोद द्विवेदी ने खुलासा किया कि मुख्य सचिव म.प्र. शासन के पत्र के आधार पर अनुपयोगी परिसंपत्तियों के व्यवसायीकरण मौदिकरण द्वारा शासन के अतिरिक्त राजस्व उपलब्ध कराये जाने के लिए म.प्र. में कुल 142 से अधिक नजूल की संपत्तियों की नीलामी की गई। नीलामी पश्चात् सभी की रजिस्ट्रियां की गई। इन रजिस्ट्रियों में कुछ में स्टाम्प ड्याूटी की कमी पाई गई है तो अधिकांश में रजिस्ट्री त्रुटीपूर्ण हुई है म.प्र. शासन लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग समाप्त किया जा चुका है परन्तु जो रजिस्ट्रियां हुई वो जिला कलेक्टर के माध्यम से हुई।

रजिस्ट्रियों में जिन अधिकारियों को अधिकृत किया गया उनका केवल नाम ही लिख दिया गया जबकि लिखा जाना था म.प्र. राज्यपाल की ओर से कलेक्टर तर्फे अधिकृत विभागीय अधिकारी। इंदौर जिले में सबसे ज्यादा कारनामा, गलतियाँ हुई है। कुल 11 रजिस्ट्रियां हुई है जिसमे से केवल 1 सही हुई है।

ग्राम पिपलियाहाना की 3, निपानिया की 2, गाडराखेडी की 2, स्कीम न.59 की 1, बिचौली हप्सी की 1 व अन्य स्थान की कि गई है। द्विवेदी ने बताया कि ई-रजिस्ट्री में फार्म महत्वपूर्ण होता है और फार्म में ही अधिकारी का पदनाम, हैसियत आदि का विवरण नहीं डाला गया है। सीधे-सीधे विक्रेता बताया गया है जबकि डीड विक्रय पत्र में कुछ में सही विवरण दिया गया है।

अब वे अधिकारी जिन्होंने रजिस्ट्रियों में हस्ताक्षर किये है अधिकांश का स्थान्तरण हो चुका है तो कुछ का पदनाम बदल चूका है, तो संशोधन कैसे होगा? क्रेता जब संपत्ति का टाईटल सर्टिफिकेट प्राप्त करेंगे, लोन लेंगे, नक्शा पास करवाएँगे तो परेशानी आएगी।