ऑपरेशन FAST-2.0' के तहत बड़ी कार्रवाई... फर्जी सिम से साइबर प्रॉड कराने वाला आरोपी गिरफ्तार आरोपी ने फर्जी तरीके से एक्टिवेट की थीं 33 सिम, देश के 17 राज्यों की 55 शिकायतों से जुड़े तार
इंदौर। शहर में साइबर अपराधों और अवैध रूप से सिम एक्टिवेशन के खिलाफ क्राइम ब्रांच इंदौर द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान 'ऑपरेशन FAST-2.0' के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की गई है। पुलिस ने फर्जी तरीके से सिम एक्टिवेट कर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराने वाले आरोपी धर्मेंद्र को गिरफ्तार किया है।
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चालू की गई 33 सिमों का इस्तेमाल देशभर में साइबर ठगी के लिए किया जा रहा था। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के तकनीकी विश्लेषण में इन नंबरों के तार देश भर की कुल 55 साइबर प्रॉड शिकायतों से जुड़े पाए गए हैं। क्राइम ब्रांच इंदौर से मिली जानकारी के अनुसार, ऑपरेशन FAST-2.0 के तहत की गई कार्रवाई में आरोपी धर्मेंद्र को पकड़ा गया, जिसने फर्जी केवाईसी प्रक्रिया के माध्यम से 33 मोबाइल सिम एक्टिवेट करवाई थीं।
जब इन संदिग्ध नंबरों का भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र और एनसीआरपी डेटाबेस से मिलान किया गया, तो मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, बिहार, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक, ओडिशा और छत्तीसगढ़ सहित 17 राज्यों में दर्ज 55 शिकायतों में इन नंबरों की भूमिका उजागर हुई।
तकनीकी जांच में सामने आया है कि आरोपी द्वारा सप्लाई की गई इन फर्जी सिमों का उपयोग मुख्य रूप से यूपीआई प्रॉड, फर्जी कॉल, इंटरनेट बैंकिंग प्रॉड और अन्य गंभीर डिजिटल अपराधों को अंजाम देने के लिए किया जा रहा था। इनमें से कई मामलों में पीड़ितों से लाखों रुपये की धोखाधड़ी की बात सामने आई है, जिसका पृथक वित्तीय सत्यापन किया जा रहा है। फिलहाल क्राइम ब्रांच पुलिस आरोपी धर्मेंद्र द्वारा अपनाई गई फर्जी केवाईसी प्रक्रिया, सिम एक्टिवेशन नेटवर्क और उसके साथ जुड़े अन्य सहयोगियों के संबंध में गहन डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर इन 55 शिकायतों का पूर्ण सत्यापन किया जा रहा है। आरोपी से विस्तृत पूछताछ जारी है, जिससे साइबर ठगी के एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश होने की संभावना है।
