अटके नक्शों को मिली राह, अब डाटा फॉर्म से आसान होगी भवन अनुमति
वर्षों से भवन निर्माण की अनुमति का इंतजार कर रहे इंदौर के हजारों रहवासियों के लिए राहत की खबर है। मध्य क्षेत्र के ऐसे इलाकों में, जहां स्थल अनुमोदन की तकनीकी अड़चन के कारण भवन नक्शे अटके हुए थे, अब डाटा फॉर्म के माध्यम से नक्शा स्वीकृति का रास्ता साफ हो गया है। इसके साथ ही मध्य क्षेत्र से बाहर के ऐसे क्षेत्रों को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है, जहां इसी तरह की समस्या के कारण भवन अनुज्ञा नहीं मिल पा रही थी।
दरअसल, पुराने और पहले से बसे हुए कई इलाकों में लोगों के पास जमीन की रजिस्ट्री होने के बावजूद भवन का नक्शा स्वीकृत कराने में परेशानी आती थी। इसकी प्रमुख वजह संबंधित भूखंड का नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से स्थल अनुमोदन या अभिन्यास से जुड़ी प्रक्रिया पूरी नहीं होना थी। नतीजतन लोग नया मकान बनाने या पुराने मकान के पुनर्निर्माण की अनुमति के लिए लंबे समय तक कार्यालयों के चक्कर लगाते रहे।
डाटा फॉर्म को सरल भाषा में ऐसी व्यवस्था माना जा सकता है, जिसमें निर्धारित शर्तों के तहत उपलब्ध भूमि और रिकॉर्ड संबंधी जानकारी के आधार पर भवन अनुज्ञा की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। हालांकि इसका अर्थ नियमों से पूरी छूट नहीं है। भूखंड का क्षेत्रफल, भूमि उपयोग, सड़क, निर्माण का प्रस्ताव और अन्य निर्धारित शर्तों की जांच के बाद ही अनुमति दी जाएगी।
पूर्व में इंदौर के मध्य क्षेत्र के 36 इलाकों में स्थल अनुमोदन की समस्या के कारण नक्शे अटकने की जानकारी सामने आई थी। डाटा फॉर्म के जरिए इन मामलों को आगे बढ़ाने की पहल की गई थी। अब शासन स्तर पर भूमि विकास नियमों में किए गए बदलाव से इस व्यवस्था को और व्यापक आधार मिलने की उम्मीद है।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि नियमों में संशोधन से छोटे भूखंडों पर भवन निर्माण और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया सरल होगी तथा नागरिकों को राहत मिलेगी। इस बदलाव से उन नागरिकों को विशेष फायदा हो सकता है, जिनके भूखंड पहले से विकसित और आबाद क्षेत्रों में हैं, लेकिन केवल तकनीकी अनुमोदन की समस्या के कारण नक्शा स्वीकृत नहीं हो पा रहा था।
हालांकि बड़े या अविकसित भूखंडों के लिए संबंधित विभाग की आवश्यक अनुमतियां पहले की तरह जरूरी रहेंगी।
