पिता को याद कर छलके कविता के आंसू विजयवर्गीय ने गले लगाकर बंधाया ढांढस
राष्ट्रीय पदाधिकारियों के स्वागत में नदारद रहे विधायक पटेल और ठाकुर
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के कल इन्दौर आगमन पर रैली निकाली गई। महासचिव बनाए गए गजेन्द्र पटेल और मंत्री बनाई गई कविता पाटीदार का विमानतल से भाजपा कार्यालय तक जगह-जगह स्वागत किया गया। भाजपा कार्यालय पर मंच पर पिता को याद कर पाटीदार के आंसू छलक गए।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भाजपा कार्यालय पर आयोजित सम्मान समारोह में अपना उदबोधन दे रहे थे। इसी दौरान उन्हाेंने कविता पाटीदार के पिता एवंं पूर्व मंत्री भेरूलाल पाटीदार का स्मरण किया इसके बाद पिता को याद कर मंच पर कविता के आंसू छलक गए। कविता ने अपने पिता के करीबी विजयवर्गीय के पैर छुए, उनकी आंखों में आंसू देख भावुक क्षण में विजयवर्गीय ने भी कविता को गले लगाकर ढांढस बंधाया।
राष्ट्रीय पदाधिकारियों के स्वागत के लिए एयरपोर्ट से भाजपा कार्यालय तक अलग-अलग जगह स्वागत किया गया। रैली मार्ग को विधानसभावार बांटा गया था। खास बात यह है कि स्वागत में विधायक उषा ठाकुर और मनोज पटेल नदारद रहे। उषा ठाकुर वैसे कल अपनी विधानसभा क्षेत्र में ही थी इसके बावजूद वे स्वागत में नहीं पहुंची।
गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव के बाद से ही कविता पाटीदार और उषा ठाकुर के सम्बंधों की चर्चा राजनीतिक गलियों में रही है। कुछ माह पूर्व में महू में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुए कार्यक्रम में भी शिलान्यास पट्टिका पर नाम नहीं होने के कारण पाटीदार ने नाराजगी जताई थी जिसके बाद दोनों नेत्रियां एक बार फिर आमने-सामने हुई। इधर मनोज पटेल भी अपने पिता के स्मरण में कराए जा रहे कार्यक्रम में व्यस्त होने के कारण नहीं पहुंचे।
वहीं तुलसीराम सिलावट कैबिनेट में शामिल होने के लिए भोपाल गए थे। ओरछा की जिम्मेदारी होने के कारण गौरव रणदिवे भी शहर से बाहर थे। सावन सोनकर सहित कई पदाधिकारी नजर नहीं आए। खास बात यह है कि कविता पाटीदार अम्बेडकर नगरी महू क्षेत्र से है, इसके बावजूद उषा ठाकुर समर्थक एवं मंडल अध्यक्षों ने स्वागत से दूरी बनाए रखी।
मिश्रा ने विजयवर्गीय को रोका
कल राष्ट्रीय संगठन पदाधिकारियों के स्वागत के लिए नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को कैबिनेट में शामिल होने से रोक लिया। मंत्री विजयवर्गीय ने मंच से कहा कि मिश्रा का आदेश था इसलिए कैबिनेट में नहीं गया। अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शहर में दो मंत्री है, लेकिन मिश्रा ने केवल एक मंत्री को ही क्यों रोका, क्या सिलावट ने उनकी बात नहीं मानी या फिर खराब मैनेजमेंट के कारण एक ही मंत्री उनकी बात सुनते है।
