नवकारसी विवाद में ट्रस्ट की कार्यशैली पर उठे सवाल
भगवान नेमिनाथ के जन्म एवं दीक्षा कल्याणक अवसर पर श्री अजितनाथ जैन लाल मंदिर की ओर से प्रस्तावित नवकारसी आयोजन को लेकर श्री वर्धमान तप आयंबिल खाता ट्रस्ट, महावीर मार्ग पीपली बाजार में अनुमति को लेकर विवाद की स्थिति सामने आई। घटनाक्रम के बाद समाज में धार्मिक आयोजनों के प्रति जिम्मेदारों की भूमिका और आपसी समन्वय को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार लाल मंदिर के स्वयंसेवक नवकारसी के आयोजन के लिए आयंबिल खाता भवन पहुंचे थे।
स्वयंसेवकों द्वारा बताया गया कि उनकी पुण्यपाल से पूर्व चर्चा हुई है और आयोजन की सहमति मिल चुकी है। इसी दौरान संस्था के जिम्मेदारों की ओर से आपत्ति सामने आने की बात भी कही जा रही है। स्वयंसेवकों के अनुसार अनुमति को लेकर बातचीत के दौरान यह कहा गया कि यहां आयंबिल चल रहे हैं, इसलिए नवकारसी संभव नहीं है। इससे नवकारसी के लाभार्थियों और लाल मंदिर ट्रस्ट मंडल में निराशा की स्थिति बनी।
मामला सामने आने के बाद आयंबिल खाता के एक अन्य जिम्मेदार राजकुमार सुराणा से अक्षय जैन ने चर्चा की। मामला सुर्खियों में आने का भय विवाद तूल पकड़ने की स्थिति संभावना देख उन्होंने कहा कि उनके अनुसार लाल मंदिर के दो स्वयंसेवक पटवा डांगी वहां आए थे और बातचीत में पुण्यपाल का नाम लिया गया, जिसके बाद मामला उलझ गया। हालांकि पदाधिकारी ने विवाद को बढ़ाने के बजाय समाधान का रास्ता निकाला और नवकारसी का आयोजन आयंबिल खाता उपाश्रय भवन में करने की सहमति दी।
नाम और अनुमति से बड़ा है धार्मिक आयोजन
घटना ने समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है कि धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में आपसी संवाद और समन्वय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए या पद और अनुमति का प्रश्न बड़ा बनाया जाना चाहिए। भगवान नेमिनाथ के कल्याणक जैसे अवसर पर नवकारसी का आयोजन किसी व्यक्ति विशेष का कार्यक्रम नहीं, बल्कि धार्मिक भावना से जुड़ा पुण्य कार्य है ऐसे में यदि आयोजन को लेकर मतभेद पैदा होते हैं तो जिम्मेदारों से अपेक्षा रहती है कि वे संवाद के माध्यम से समाधान निकालें।
समाज में यह चर्चा भी तेज है कि धार्मिक संस्थाओं की जिम्मेदारी केवल व्यवस्थाएं संचालित करना नहीं, बल्कि समाज को जोड़ना और सहयोग का वातावरण बनाना भी है। किसी धार्मिक आयोजन में छोटी- सी बात को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना देने से अनावश्यक विवाद पैदा होते हैं।
जिम्मेदारों से आत्ममंथन की अपेक्षा
इस पूरे घटनाक्रम ने श्री वर्धमान तप आयंबिल खाता ट्रस्ट के जिम्मेदारों की कार्यशैली को लेकर आत्ममंथन की जरूरत सामने रखी है। सभी जिम्मेदारों से समाज की अपेक्षा है कि भविष्य में धार्मिक आयोजनों को लेकर संवाद और समन्वय की व्यवस्था स्पष्ट हो, ताकि किसी पुण्य आयोजन में अनावश्यक अड़चन या विवाद की स्थिति पैदा न हो। समाजिक उत्थान ओर कल्याण के उद्देश्य से गठित ट्रस्ट को अपनी निज प्रतिष्ठान की तरह संचालित नहीं करना चाहिए।
इस घटनाक्रम को सार्वजनिक करने का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को कटघरे में खड़ा करना नहीं, बल्कि समाज में यह संदेश देना है कि धर्म के क्षेत्र में पद से अधिक महत्वपूर्ण विनम्रता, संवाद और सेवा की भावना है। भगवान नेमिनाथ के जन्म एवं दीक्षा कल्याणक का अवसर त्याग और वैराग्य की प्रेरणा देता है। ऐसे अवसर पर समाज के जिम्मेदारों से भी अपेक्षा है कि वे अहंकार नहीं, समन्वय; आदेश नहीं, संवाद और अधिकार नहीं, सेवा को प्राथमिकता दें।
