राजनीति में कोई सोच भी नहीं सकता है अपनी कुर्सी किसी को दें-विजयवर्गीय पुष्पगिरि में विजयवर्गीय के घर पहुंचे थे जैन संत पट्टविभूषण संस्कार महोत्सव में बोले मंत्री
पुष्पगिरि तीर्थ में पट्टविभूषण संस्कार महोत्सव का आयोजन हुआ। आयोजन में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी शिरकत की। इस दौरान उन्होने आचार्य पुष्पदंत सागर म.सा. का आशीर्वाद लिया और कहा कि यह त्याग केवल संत ही कर सकते है, अपने शिष्य को वक्रचक्रवर्ती की अपना स्थान देना आसान नहीं होता है, मैं जिस बिरादरी से आता हूं...राजनीति से वहां कोई सोच भी नहीं सकता कि अपनी कुर्सी किसी को दें।
मंत्री के इस बयान के राजनीतिक गलियारों में कई मायने खोजे पत्नी को गम्भीर हार्ट अटैक आया था, उस वक्त डॉक्टरों ने भी हाथ टेक दिए थे। इस बात की जानकारी जब आचार्य पुष्पदंत सागर म.सा. को लगी तो वे सोनकच्छ से चलकर सुबह 5 बजे मेरे घर आ गए थे। एक साधक ने मुझे कहा कि सवा किलो लोंग की व्यवस्था कर लेना।
इसके बाद मुनिश्री ने विजयवर्गीय के घर में बने सनातन धर्म के मंदिर में साधना की। विजयवर्गीय ने यह भी कहा कि साधना के परिणाम स्वरुप आज मेरी पत्नी स्वस्थ है।
जा रहे है। कुछ लोगों ने तो इस लिया है। हालांकि विजयवर्गीय ने बयान को विजयवर्गीय के खास रमेश धार्मिक मंच पर सामान्य रूप से यह मेंदोला के मंत्री न बनने से भी जोड़ बात कही थी।
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