सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

100 किलो प्रतिदिन गीला कचरा निकालने वालों को करनी होगी वेस्ट रीसायकल की व्यवस्था

नगर निगम ऐसे वेंडर उपलब्ध करवाएगा जो गीले कचरे का निपटान करें और उसके छोटे संयंत्र स्थापित करें

इंदौर। शहर में वेस्ट प्रबंधन की व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन होने जा रहा है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन ( ) नियम, 2026, 1 अप्रैल 2026 से पूरे भारत में प्रभावी हो चुके हैं।

इसी के तहत अब शहर में ऐसे गीला कचरा निकलने वाले संस्थान रहवासी समिति को वेस्ट प्रबंधन की व्यवस्था स्वयं करनी होगी इसके लिए वे दो तरीके से वेस्ट प्रबंधन को पूरा कर सकेंगे। जिसका पहला तरीका किसी एजेंसी को गीला कचरा समिति द्वारा दिया जाएगा जो उसको रीसायकल करेगी इसके लिए वह कंपनी समिति से अपना चार्ज लेगी। इसके अलावा समिति खुद कॉलोनी या प्रतिष्ठान अपना वेस्ट प्रबंधन संयंत्र अपने परिसर में स्थापित कर सकेंगे।

मतलब स्पष्ट है कि शहर में अब बड़े संस्थान जो की 100 किलो से अधिक कचरा प्रतिदिन निकलते हैं उनका कचरा नगर निगम द्वारा नहीं उठाया जाएगा वह एजेंसी के माध्यम से अपना कचरा उठा सकेंगे या फिर खुद अपना वेस्ट प्रबंधन प्लांट अपने परिसर में लगाएंगे। इसलिए डोर टू डोर कचरा कलेक्शन और रीसायकल की जिम्मेदारी नगर निगम की कम होगी। केवल पुराना आवासीय क्षेत्र जहां रहवासी सोसाइटी या नहीं है, उन क्षेत्रों से डोर टू डोर कचरा कलेक्शन होगा।

इंदौर नगर निगम द्वारा ऐसे वेंडर्स को आमंत्रित किया गया है जो डोर टू डोर वेस्ट कलेक्शन करके अपना बायो सीएनजी प्लांट स्थापित करें और वेस्ट प्रबंधन की जिम्मेदारी उठाएं। इसके अलावा ऐसी एजेंसियां भी आमंत्रित की गई हैं जो वेस्ट प्रबंधन प्लांट परिसर में स्थापित करने और संचालित करने में सक्षम हो। हालांकि वेस्ट प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञ इस मामले में बताते हैं कि कचरे के प्रबंधन की जिम्मेदारी व्यावसायिक प्रतिष्ठान द्वारा उठाए जाने की बात समझ में आती है क्योंकि वह बायो कंपोस्ट प्लांट के साथ रीसायकल प्लांट भी स्थापित कर सकते हैं क्योंकि वेस्ट मैनेजमेंट पर नगर निगम को दिए जाने वाला पैसा वह प्लांट स्थापित करने और उसको संचालित करने में लगा सकते हैं लेकिन रहवासी संगठन इसको कितना कर पाएंगे यह मुश्किल है क्योंकि वर्तमान में तो नगर निगम को वेस्ट कलेक्शन का पैसा भी नहीं मिल रहा है।

वहीं दूसरी ओर फिलहाल राजनीतिक और जनप्रतिनिधियों द्वारा इस विषय को लेकर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। वह नए नियमों को लेकर किस प्रकार से आम लोगों और जन भागीदारी के साथ काम करेंगे। साथ ही शहर के लोगों के लिए क्या मुनासिब होगा।

इसको लेकर अलग-अलग मंचों पर अभी चर्चा होना बाकी है। मामले में अपर आयुक्त प्रखर सिंह ने बताया कि फिलहाल नगर निगम का पूरा जोर 100 किलो से अधिक कचरा प्रतिदिन निकालने वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर है क्योंकि डोर टू डोर कचरा कलेक्शन और इसके वेस्ट मैनेजमेंट की कास्ट दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसीलिए ऐसे कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थान अपने वेस्ट मैनेजमेंट की जिम्मेदारी स्वयं उठाएंगे जिसमें नगर निगम सहयोगी की भूमिका अदा करेगा।

फिलहाल हमने ऐसी एजेंसियों को आमंत्रित किया है जो 100 किलो से अधिक कचरा निकालने वालों को अपनी सेवाएं उपलब्ध करवा सकें चाहे वह डोर टू डोर ऐसे संस्थानों से गीला कचरा सूखा कचरा कलेक्ट करने के बाद इसके निपटान की व्यवस्था अपना स्वयं का प्लांट लगाकर करना चाहती हैं या फिर स्वयं कैसे प्रतिष्ठानों में प्लांट स्थापित करने और उसके संचालन के लिए अपनी सेवाएं दे सकें। अब इस क्षेत्र में काम करने के लिए कितनी एजेंसियां रुचि जताती है वह आने वाले समय में पता चलेगा।