सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

हालात-ए-गणतंत्र

विनोबा भावे को तो आप जानते ही होगें नई पीढ़ी शायद ही जानती हो नई पीढ़ी को हमारे इतिहास पुरुषों को जानना जरूरी है पवनार आश्रम में विनोबा जी अपने शिष्यों को पढ़ा रहे थे, तभी पत्रवाहक गांधी जी का एक पत्र लेकर आया विनोबा जी ने पत्र आधा पढ़ा और फाड़ दिया शिष्य हैरान व आवाक रह गए शिष्य सोच रहे कि गांधी जी ने ऐसा क्या लिख दिया कि विनोबा जी ने पत्र फाड़ दिया शिष्यों ने पूछा तो विनोबा जी बोले गांधी जी ने वह लिख दिया जो मुझमें नहीं है प्रशंसा कर लिखा है तुम देश भक्त हो तुममें सादगी है श्रम, शालीनता, सहानुभूति, शांति संयम जैसे महान गुण है इस पर मुझे गर्व है, विनोबा जी बोले पर ये गुण मैं अपने में नही देखता इसलिए मैने पत्र फाड़ दिया फिर बोले यदि मैं यह पत्र रख लेता और कभी पढ़ता तो हो सकता है मेरे मन में अहंकार आ जाता ऐसे देश भक्त अहंकार रहित थे विनोबा जी, क्या गौरव शाली अतीत था हमारा आज अहंकार पराकाष्ठा पर है सत्ता से सवाल याने देशद्रोह एक लाख स्कूल बंद पर भी दंभ डंके की चोट पर भ्रष्टाचारियों की पैरवी व सत्ता सुख प्रदान शुद्ध पेट्रोल जब है ही नही तो क्या तुम्हारे बाप के घर से आएगा बेशर्मी की हद पेपर लीक वाले मंत्री का लोकसभा में सम्मान यह क्रूरता है लोकसभा में झूठ बोलना कि आपरेशन सिंदूर में कोई सैनिक शहीद नहीं हुआ, गजब धूर्तता अहंकार इतना की कुत्ता भी लड़ाए तो जीत जाए 170/पीवर पेट्रोल मिल रहा है ले लो झूठ, फरेब और सीऩाजोरी का परचम अहंकारी, पता नही कहाँ ले जाकर छोड़ेंगे देश का लोकतंत्र नकुल रतन पाटोदी