सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

लंदन में रखी मूर्ति भोजशाला की मूल वाग्देवी ही, भारत लाने की प्रक्रिया तेज

ब्रिटिश म्यूजियम में रखी प्रतिमा का लीगल वेरिफिकेशन पूरा, केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने आधिकारिक जानकारी दी...

प्रतिनिधि नितिन राठौर)। लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी 11वीं सदी की ऐतिहासिक मां वाग्देवी (सरस्वती) की प्रतिमा को लेकर एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता मिली है,केंद्र सरकार की जांच और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि हो गई है कि लंदन में रखी यह प्रतिमा मध्य प्रदेश के धार की ऐतिहासिक भोजशाला की ही मूल मूर्ति है। भोपाल में आयोजित ब्रिक्स सांस्कृतिक कार्य समूह की बैठक से पहले आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने इस कानूनी सत्यापन के पूरे होने की आधिकारिक घोषणा की,इस पुष्टि के बाद भारत सरकार ने प्रतिमा को वापस देश लाने के लिए राजनयिक स्तर पर अपनी कोशिशें और तेज कर दी हैं,इस खबर के सामने आते ही धार सहित पूरे देश के हिंदू समाज और श्रद्धालुओं में हर्ष की लहर दौड़ गई है।

गौरतलब है कि इसी साल मई में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोजशाला को मूल रूप से वाग्देवी का मंदिर मानते हुए वहां नियमित पूजा-अर्चना की अनुमति दी थी, इसके साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार को ब्रिटिश म्यूजियम से मूल वाग्देवी प्रतिमा को भारत वापस लाने के लिए तत्काल और आवश्यक कदम उठाने के कड़े निर्देश दिए थे। कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार, भारतीय राजनयिकों और ब्रिटिश म्यूजियम के बीच कानूनी औपचारिकताएं तेजी से पूरी की गईं, जिसके बाद मूर्ति के असली होने पर अंतिम मुहर लग सकी, सूत्र बताते है की प्रतिमा इतिहासकारों के अनुसार, इस दिव्य और कलात्मक प्रतिमा को वर्ष 1034 ईस्वी में परमार वंश के प्रतापी राजा भोज ने धार की भोजशाला जो उस समय शिक्षा और संस्कृति का बड़ा केंद्र थी में स्थापित किया था।

ब्रिटिश शासन के दौरान एक अंग्रेज अधिकारी मेजर जनरल विलियम किनकेड इस प्राचीन मूर्ति को अपने साथ ले गए थे। साल 1886 में यह प्रतिमा लंदन पहुंची और 1909 से इसे ब्रिटिश म्यूजियम में प्रदर्शित किया गया है, केंद्रीय संस्कृति सचिव ने बताया कि देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को वापस लाने के अभियान में पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व तेजी आई है। साल 2014 से पहले जहां विदेशों से केवल 13 धरोहरें ही वापस लाई जा सकी थीं, वहीं पिछले 12 वर्षों में सरकार के निरंतर प्रयासों और मजबूत विदेश नीति के कारण 650 से अधिक अमूल्य ऐतिहासिक कलाकृतियां और मूर्तियां सफलतापूर्वक भारत लौट चुकी हैं।

अब मां वाग्देवी की प्रतिमा की घर वापसी को भी इसी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा गया है। लीगल वेरिफिकेशन पूरा होने की खबर मिलते ही धार में उत्सव जैसा माहौल है। भोजशाला परिसर में श्रद्धालुओं ने मां वाग्देवी की एक प्रतिरूप मूर्ति स्थापित कर विधि-विधान से पूजा- अर्चना पहले सेची शुरू कर दी थी।

स्थानीय संगठनों और संतों का कहना है कि यह करोड़ों सनातनियों की आस्था की बड़ी जीत है और अब वह दिन दूर नहीं जब मां वाग्देवी अपनी मूल जगह पर दोबारा विराजेंगी।