सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

दतिया उपचुनाव के बाद एक दर्जन जिलाध्यक्ष बदलने की कवायद धार ग्रामीण जिलाध्यक्ष चंचल की छुट्टी तय!

आदिवासी और वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी चंचल को पड़ेगी भारी

प्रतिनिधि नितिन राठौर)। मध्य प्रदेश भाजपा संगठन में जल्द ही एक बड़ी संगठनात्मक सर्जरी होने जा रही है, दतिया विधानसभा उपचुनाव के संपन्न के बाद प्रदेश नेतृत्व प्रदेश के एक दर्जन से अधिक जिला अध्यक्षों को बदलने की तैयारी

सूत्रों की माने तो इस बदलाव की फेहरिस्त में धार ग्रामीण के भाजपा जिलाध्यक्ष चंचल पाटीदार का नाम सबसे ऊपर चल रहा है। सूत्रों की मानें तो उपचुनाव के तुरंत बाद उनकी छुट्टी होना लगभग तय माना जा रहा है, चंचल की जिलाध्यक्ष पद से विदाई की मुख्य वजह आदिवासी नेताओं की अनदेखी और ग्रामीण भाजपा मे गुटबाजी माना जा रहा है,धार जिला देश के सबसे बड़े आदिवासी बाहुल्य जिलों में शुमार है,पार्टी ने संगठन को मजबूती देने के में है। लिए धार में पहली बार शहरी और ग्रामीण के रूप में दो जिलाध्यक्ष बनाए थे, लेकिन ग्रामीण जिलाध्यक्ष चंचल पाटीदार पर लगातार आरोप लग रहे हैं कि उनके कार्यकाल में स्थानीय व वरिष्ठ आदिवासी नेताओं की घोर अनदेखी की गई, इसके अलावा संगठन के भीतर आपसी गुटबाजी को बढ़ावा देने और कार्यकर्ताओं में सामंजस्य न बैठा पाने की शिकायतें लगातार भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय तक पहुँच रही थीं,वही पार्टी के भीतर बढ़ते आंतरिक कलह और आदिवासी नेताओं की नाराजगी को देखते हुए प्रदेश नेतृत्व डैमेज कंट्रोल के मूड में है, धार ग्रामीण क्षेत्र में भाजपा की पकड़ को दोबारा मजबूत करने के लिए अब किसी ऐसे नए और सर्वमान्य चेहरे को कमान सौंपने की कवायद तेज हो गई है, जो सभी गुटों को साथ लेकर चल सके,फिलहाल संगठन दतिया उपचुनाव की व्यस्तताओं में है, जिसके बाद बदलाव की यह आधिकारिक सूची कभी भी जारी हो सकती है,विश्वनीय सूत्र बताते है की संघ की सीक्रेट रिपोर्ट में भी पाटीदार की परफॉर्मेंस कमजोर पाई गई है, केवल संगठन ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आंतरिक सर्वे में भी धार ग्रामीण भाजपा की स्थिति को चिंताजनक बताया गया था रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया था कि अगर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं और आदिवासी नेताओं के बीच की खाई को तुरंत नहीं भरा गया, तो आने वाले समय में पार्टी को इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इसी सीक्रेट फीडबैक के आधार पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष की हरी झंडी के बाद यह बदलाव होने जा रहा है,धार जिले में चुनावी और संगठनात्मक संतुलन को साधने के लिए प्रदेश संगठन पहले ही शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग अध्यक्ष नियुक्त कर चुका है,लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में बढ़ते असंतोष और आदिवासी नेताओं की नाराजगी को देखते हुए अब कमान किसी नए और सर्वमान्य चेहरे को सौंपने की कवायद को अंतिम रूप दिया जा रहा है।