कागजों में अस्पताल, धरातल पर खाली जमीन-पूर्व विधायक पटेल
खजराना स्वास्थ्य केंद्र की दुर्दशा पर तीखा प्रहार
इंदौर के खजराना क्षेत्र में प्रस्तावित 100-बिस्तर के अस्पताल को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। अस्पताल के निर्माण के नाम पर हो रही प्रशासनिक लापरवाही और कागजी खेल को लेकर पूर्व विधायक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सत्यनारायण पटेल ने गंभीर सवाल उठाए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस अस्पताल के लिए डॉक्टरों की नियुक्ति और तबादले तक हो चुके हैं, वहां मौके पर कोई भवन ही नहीं है, बल्कि केवल एक खाली जमीन पड़ी है, जिस पर अब छोटे छोटे अतिक्रमण ही नजर आ रहे है।
पटेल ने कहा कि उन्होने साथियों के साथ जब खजराना के प्रस्तावित अस्पताल स्थल का औचक निरीक्षण किया तो वह स्तब्ध रह गए। पटेल ने देखा कि वहां कोई अस्पताल भवन मौजूद ही नहीं है। पटेल ने कहा, 'यह देश का संभवतः पहला ऐसा अस्पताल होगा जो केवल सरकारी फाइलों में चल रहा है।
हद तो तब हो गई जब हमें पता चला कि बिना किसी ईंट-पत्थर के निर्माण के ही वहां डॉक्टरों की नियुक्तियां कर दी गईं और फिर उनके तबादले भी हो गए। यह जनता के साथ भद्दा मजाक नहीं तो और क्या है?' कागजों में इलाज, हकीकत में खाली जमीन ही दिखाई दी। पूर्व विधायक सत्यनारायण पटेल ने स्पष्ट किया कि खजराना की जनता के लिए स्वास्थ्य सुविधा सुलभ कराने का सपना तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के कार्यकाल में देखा गया था और इस अस्पताल की मांग भी सत्यनारायण पटेल ने ही की थी और उसी कमलनाथ सरकार के समय जगह स्वीकृत होकर बजट भी आवंटित किया गया था।
कमलनाथ सरकार के समय अस्पताल जगह का चयन, आवश्यक स्टाफ की नियुक्ति और भवन निर्माण की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी, लेकिन बाद में इस जनहित के अस्पताल को ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया और उस पर भ्रष्टाचार का पलीथन भी लगाया गया। खजराना अस्पताल का मुद्दा केवल इन्दौर का नहीं बल्कि देशभर की सूर्खियों में आ चुका है, क्योंकि अस्पताल ही गायब हो गया है और कागजों पर तबादले भी किए गए है। पूर्व विधायक सत्यनारायण पटेल ने चेतावनी दी है कि यदि खजराना अस्पताल के निर्माण कार्य में तत्काल तेजी नहीं लाई गई और स्वास्थ्य सुविधाओं को धरातल पर नहीं उतारा गया, तो कांग्रेस पार्टी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।
उन्होंने अंत में कहा, ईश्वर सद्बुद्धि दे ताकि आम जनता को वह स्वास्थ्य लाभ मिल सके जिसकी वे हकदार हैं।
