सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

संपादकीय पूर्वोत्तर के ोगों पर बढ़ते हमे: विविधता का दावा करने वो देश में क्यों असुरक्षित हैं पूर्वोत्तर के नागरिक? भा

अग-अग भाषा, संस्कृति, खान-पान और जीवनशैी के बावजूद देश की एकता कायम है। मगर इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि पूर्वोत्तर राज्यों के ोगों को आज भी देश के कई हिस्सों में भेदभाव, उपेक्षा और यहां तक कि हिंसा का सामना करना पड़ता है। उनकी अग भौगोकि और सांस्कृतिक पहचान को ेकर बने पूर्वाग्रह और गत धारणाएं इस समस्या को और गंभीर बनाती हैं।

दिली में मणिपुरी संगीतकार चोंगथाम विक्रम सिंह की हत्या को भी इसी धारणा से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे एक बार फिर यह सवा उठ रहा है कि क्या दिली जैसे महानगरों की चकाचौंध में नागरिकों की सुरक्षा का मसा हाशिये पर चा गया है। निश्चित तौर पर यह सरकार और कानून-व्यवस्था की नाकामी का भी प्रश्न है, क्योंकि देश की राजधानी होने के बावजूद यहां बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के दावे अक्सर खोखे साबित होते हैं।

गौरतब है कि दिली की सनाइट काोनी में बीते रविवार की रात को मणिपुरी संगीतकार विक्रम सिंह ने अपने घर के पास कुछ ोगों को शराब पीकर हंगामा और शोर मचाने से रोकने की कोशिश की थी। इसी से गुस्साए ोगों ने उनसे मारपीट की, जिससे उनकी मौत हो गई। यों हर अपराध कानून-व्यवस्था की विफता का सूचक है, ेकिन जब कोई पीड़ित देश के पूर्वोत्तर राज्य से हो, तब ऐसी घटना को एक व्यापक सामाजिक संदर्भ में देखा जाता है।

पूर्वोत्तर राज्यों के ोग अक्सर यह शिकायत करते रहे हैं कि दिली सहित देश के अनेक शहरों में उन्हें केव शक्-सूरत, भाषा, खान-पान और जीवन-शैी के कारण पूर्वाग्रहों से भरी दृष्टि से देखा जाता है। इस क्षेत्र के ोगों पर किसी दूसरे प्रदेश में नसीय दुराग्रहों की वजह से हमे या उनकी हत्या के मामे भी अक्सर सामने आते रहे हैं।

भेदभाव की यह प्रवृत्ति न केव ऐसे पूर्वाग्रह पाने वाों की सोच पर सवा उठाती है, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता की भावना को भी चोट पहुंचाती है। इसिए हत्या की इस वारदात की जांच निष्पक्ष तरीके से की जानी चाहिए और इसमें यह भी देखना जरूरी है कि क्या इसके पीछे किसी तरह का भेदभाव या इससे उपजी पूर्वाग्रह की मानसिकता तो नहीं थी!

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