सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

बारिश की बेरुखी के कारण शहर में फिर बन रही जल संकट की स्थिति उद्यान विभाग के 10 टैंकर करना पड़े चालू, जहां पौधे लगाए वहां अब पानी की कमी, रहवासी क्षेत्र में चल रहे हैं 300 से अधिक टैंकर

वर्तमान में अजीब परिस्थितियां बनी हुई है जो बोरिंग रिचार्ज हुए थे वह बारिश नहीं होने के कारण फिर से सूखने लगे हैं। जहां अगस्त माह में तरबतर मौसम रहता है और बारिश की झड़ी लगी रहती थी, नदी-नलों में उफान रहता था लेकिन इंदौर में ऐसा लग रहा है कि यह इतिहास के पन्नों की बात हो गई। पूरे शहर में कहीं भी एक साथ लगातार दो-तीन घंटे की भी बारिश दिखाई नहीं दे रही है।

ऐसी स्थिति में नगर निगम की चिंता बढ़ गई है। शहर में 21 लाख पौधे लगाने का अभियान चल रहा है जिसके तहत अब तक 4:30 लाख पौधे अलग-अलग स्थान पर नगर निगम लगा चुका है। प्रति रविवार को अलग-अलग पहाड़ियों पर पौधारोपण किया जा रहा है लेकिन अब यहां जल संकट की स्थिति बनने लगी है।

नगर निगम ने उद्यान विभाग के 70 टैंकर बंद कर दिए थे इनमें से पानी के 10 टैंकर चालू करना पड़े हैं।

मामले में उद्यान प्रभारी राजेंद्र राठौड़ ने बताया कि पौधे लगाने के साथ ही उन्हें जीवित रखने की चिंता भी बढ़ रही है। हमने लगभग चार से पांच बड़ी पहाड़ियों पर पौधारोपण किया है जिसमें बीएसएफ, बुडानिया, रेवतीरेंज, पितृ पर्वत देवगुराडिया जैसे प्रमुख स्थान है जहां पर पानी की व्यवस्था हमें करनी पड़ रही है। बारिश का मौसम है लेकिन पर्याप्त पानी नहीं बरसाने के कारण पौधे मरे नहीं इसीलिए हमने आकस्मिक व्यवस्था टैंकरों के माध्यम से कर दी।

यह उम्मीद नहीं थी कि अगस्त माह में इतना कम पानी गिरेगा। इसके अलावा अलग-अलग वार्डो के उद्यानों में भी पानी की कमी महसूस की जा रही है। जिस तरह से बारिश होनी थी वह नहीं हुई है इसीलिए उद्यान के बोरिंग भी अभी से सूखने लगे हैं।

रहवासी क्षेत्र से भी पानी की डिमांड आने लगी है। नगर निगम जलकार्य प्रभारी बबलू शर्मा ने बताया कि शहर में एक बार फिर पानी की डिमांड बढ़ने लगी है। शहर की अधिकांश कॉलोनी से पानी के टैंकरों के लिए फोन सभी पार्षदों को आ रहे हैं।

लोगों का कहना है कि बोरिंग सूखने लगे की मांग आ रही है। पानी नहीं गिरा तो विकट स्थिति होगी। केवल अब सितंबर माह से ही आस बची हुई है। हमें जल्द ही पानी के और टैंकर बढ़ाने पड़ सकते हैं। वही मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र नायक बताते हैं कि यह मौसम चक्र परिवर्तन का असर है।

सितंबर माह मानसून के लौटने का महीना 3 साल पहले तक हुआ करता था लेकिन अब तक इंदौर में अच्छी बारिश ही नहीं हुई है बल्कि आसपास के जिलों में बारिश हो रही है खासकर मालवा बेल्ट में बारिश कमजोर है।