सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

संपादकीय चीनी पैदा करने में आगे, फिर मिठास पर पहरा क्यों? एथेनॉल से भंडारण सीमा तक सवाल वि

अतिरेकी उत्साह देखा जा रहा है, उसकी वजह से चीनी की कमी हुई है और कीमतें बढ़ी हैं। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। यही वजह है कि यहां उत्पादन और खपत को लेकर आमतौर पर एक संतुलित स्थिति कायम रही है। कारोबारियों के लिए पंद्रह दिन का भंडारण तय करने का सरकारी फैसला पहली नजर में बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश दिखाई देता है।

मगर सवाल यह है कि क्या इस कदम से वास्तव में चीनी सस्ती होगी या फिर इसके बावजूद उपभोक्ता को राहत नहीं मिलेगी। चीनी का बाजार केवल मिलों और व्यापारियों से नहीं चलता। इसके पीछे किसान, परिवहन, थोक विक्रेता, किराना दुकानदार और अंतत: वह आम परिवार है, जिसकी रसोई में हर महीने चीनी की जरूरत पड़ती है।

जब कीमत बढ़ती है, तो उसका असर केवल चाय की मिठास तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मिठाई, बिस्कुट, पेय पदार्थ और अन्य खाद्य वस्तुएं भी महंगी हो जाती हैं। अगर पंद्रह दिन की भंडारण सीमा का उद्देश्य जमाखोरी रोकना है, तो यह स्वागतयोग्य है। मगर सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि छोटे कारोबारियों पर नियमों का अनावश्यक बोझ न पड़े।

बड़े कारोबारी तो नियमों की पेचीदगियों से निकलने का रास्ता निकाल लेते हैं, लेकिन छोटा व्यापारी अक्सर निरीक्षण, कागजी कार्रवाई और प्रशासनिक दबाव का सबसे आसान निशाना बन जाता है। ऐसी स्थिति बाजार को स्वस्थ बनाने के बजाय असंतुलित कर सकती है। गौरतलब है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है।

यही वजह है कि यहां उत्पादन और खपत को लेकर आमतौर पर एक संतुलित स्थिति कायम रही है। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों आई कि चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता पैदा हुई और इसकी कीमतों पर नियंत्रण के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ रहे हैं। विपक्षी दलों की ओर से ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं कि बीते कुछ समय से एथेनॉल बनाने को लेकर जो अतिरेकी उत्साह देखा जा रहा है, उसकी वजह से चीनी की कमी हुई है और कीमतें बढ़ी हैं।

अब उसकी भरपाई के लिए चीनी के आयात और भंडारण की सीमा लगाने की बात की जा रही है। यह ध्यान रखने की जरूरत है कि जनता को आभासी आंकड़े नहीं, राहत की जरूरत होती है। सरकार को पारदर्शी निगरानी व्यवस्था बनानी चाहिए, छोटे व्यापारियों की परेशानियां कम करनी चाहिए और बाजार में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए।