सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

फर्जी नामांतरण घोटाला में जो अधूरी कड़ियां निगम नहीं जोड़ सका वो जोड़ रही पुलिस

घोटाले में शामिल दलाल, निगमकर्मी और कम्प्यूटर आपरेटर का खोजा जा रहा लिंक

नगर निगम में सामने आए फर्जी नामांतरण घोटाले की जांच अब पुलिस के स्तर पर आगे बढ़ रही है। निगम की करीब ढाई महीने चली जांच के बाद रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी गई है। जांच में सामने आए संदिग्धों पर एफआईआर दर्ज करने के लिए निगम ने आवेदन दिया है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि मामले में आरोपियों की संख्या अभी बढ़ सकती है। इसी वजह से प्रकरण दर्ज करने से पहले अधूरी कड़ियों को जोड़ने और संदिग्धों की भूमिका स्पष्ट करने के लिए पूछताछ की जा रही है।

नगर निगम की जांच में सामने आया है कि एक ही रात में अलग- अलग 354 संपत्तियों के नाम दूसरे लोगों के नाम पर चढ़ा दिए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए निगम ने दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच कर रिपोर्ट तैयार की। इसमें कई लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।

नगर निगम के राजस्व अधिकारी आकाश सिंह के मुताबिक, निगम की जांच में जिन लोगों की भूमिका सामने आई है, उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए। जांच में दलाल, वकील और अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई है, जो आम लोगों को बरगलाने और कथित भ्रष्टाचार में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, निगम की ओर से इन्हें सीधे आरोपी नहीं बनाया गया है। इनकी भूमिका और संपर्कों की जांच पुलिस कर रही है। मामले में 51 पीड़ित भी सामने आए हैं,

उनके साथ धोखाधड़ी करने वाले और उनसे संपर्क में रहने वाले लोगों के संबंध में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।

अपर आयुक्त आकाश सिंह के अनुसार, निगम की जांच रिपोर्ट में कुल 26 लोग संदिग्ध पाए गए हैं। इनमें 18 दलाल और छह अन्य लोग शामिल हैं, जबकि बाकी संदिग्धों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस से इन सभी की भूमिका की गहनता से जिनकी संपत्तियों को कथित तौर पर धोखाधड़ी के जरिए बेचा गया।

शुरुआत में कई पीड़ित पूछताछ के लिए सामने नहीं आ रहे थे। पुलिस द्वारा कई बार बुलाए जाने के बाद उन्होंने बयान दर्ज कराए हैं। हालांकि, जांच करने का अनुरोध किया गया है। निगम अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद घोटाले में शामिल लोगों की संख्या और बढ़ सकती है। यही वजह

घोटाले की टाइमलाइन

एक ही रात: 354 संपत्तियों के नाम कथित तौर पर फर्जी तरीके से दूसरे लोगों के नाम दर्ज किए गए।

इसके बाद: नामांतरण में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आने लगीं और नगर निगम ने जांच शुरू की।

करीब ढाई महीने: निगम स्तर पर रिकॉर्ड, दस्तावेज और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की गई।

के संबंध में बयान दिए।

आए आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए आवेदन किया।

की जांच के बाद संदिग्धों की संख्या बढ़ने की संभावना है। है कि पुलिस फिलहाल मामले की सभी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। इसके बाद दोषियों की भूमिका स्पष्ट होने पर एफआईआर दर्ज किए जाने की संभावना है।

जांच के दौरान: 51 पीड़ित सामने आए, जिन्होंने संपत्ति से जुड़ी धोखाधड़ी

जांच पूरी होने पर: नगर निगम ने रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी और सामने

वर्तमान स्थिति: 26 संदिग्धों की भूमिका पुलिस के रडार पर है। दलालों, वकीलों और अन्य लोगों से पूछताछ कर अधूरी कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। पुलिस