सौदे के 31 लाख रु. मय ब्याज लौटाने के आदेश
सिविल कोर्ट ने एक अहम निर्णय में यह व्यवस्था दी है कि भागपुर जिला-इंदौर निवासी कृषक भूमि के क्रेता को बयाने की राशि रूपयें 31 लाख रुपयें 4 साल के 9 प्रतिशत ब्याज सहित वापस अदा करें। प्रकरण में कपिल कालरा संयुक्त हिन्दू परिवार इंदौर के अधिवक्ता के.पी. माहेश्वरी के अनुसार भागपुरा जिला-इंदौर निवासी-कमल कुलमी पिता मदनलाल ने उसकी मालिकी की भूमि बताते हुए बैंक ऑफ इंडिया शाखा साकेत नगर सहित कुल-31 लाख रुपयें का बयाना फरवरी 2023 में प्राप्त करते हुए 1,01,00,000/-रूपयें प्राप्त कर रजिस्ट्री कराने का वचन खरीददार को दिया था।
भूमि के सीमांकन के समय क्रेता को ज्ञात हुआ कि विक्रेता ने जो भूमि बताई थी, उसके बजाय दूसरी जमींन का सीमांकन करवा रहा है और क्रेता को बेची गई भूमि पर दूसरे लोगों का कब्जा है, जिसे छुपाया गया था। न्यायालय की सूचना पर विक्रेता कृषक ने आकर तर्क दिया कि वह वादी के पक्ष में रजिस्ट्री करवाने हेतु सदैव तत्पर व तैयार रहा है, किन्तु वादी ने झूठा दावा लगाया है। सिविल जज के समक्ष चले विचारण में न्यायालय ने पाया कि वास्तव में क्रेता से विक्रेता ने 31 लाख रूपयें बयाना लिया, जिसके बैंक स्टेटमेन्ट पेश किये है।
क्रेता ने न्यायालय में मौखिक गवाही व साक्ष्य पेश की जिसका प्रतिवादी ने कोई खण्डन नहीं किया है। जिससे सिद्ध हुआ है कि प्रतिवादी द्वारा दिनांक-01/10/2022 को 1 करोड 32 लाख रुपयें में भूमि बेचने का सौदा कर उसके बयाने पेटे 31 लाख रूपयें की राशि भी प्राप्त की है, जबकि मौका पंचनामा अनुसार सीमांकन, खसरे में बेची गई भूमि पर वैशाली गुप्ता की गेहॅूं की फसल पायी गयी और दूसरे खसरे पर चंदरसिंह का कब्जा था, जबकि अनुबंध में बेची पड़त भूमियां अन्य लोगों के कब्जे की बात को विक्रेता ने छुपाया है यानी कृषक ने अनुबंध शर्तों का उल्लंघन किया है और खरीददार के कानूनी सूचना पत्र के बाद भी उसका भुगतान लौटाया नहीं।
खरीददार की किसी भी साक्ष्य का विक्रेता कृषक ने कोई खण्डन नहीं किया। भारतीय न्याय संहिता अधिनियम में प्रावधान है कि जब कोई व्यक्ति संहिता भंग करता है, तो उसे अनुबंध की प्राप्त राशि नुकसानी सहित वापस देना होगी। किन्तु हर्जाना युक्ति-युक्त होना चाहिए, इसलिये सिविल जज सुश्री विधि डांगलिया ने फैसला दिया कि प्रतिवादी कृषक कमल कुलमी निवासी भागपुर तहसील महू जिला इंदौर वादी क्रेता कपिल कालरा निवासी इंदौर को मूल 31 लाख रुपयें सहित 09 प्रतिशत ब्याज व खर्चा जोड़कर कुल-40,00,000/- रुपयें एक माह में एकमुश्त अदा करे।
त्रुटि की दशा में फैसले के बाद अदायगी तक 06 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और अदा करते हुये दावे का 2,00,000/- रुपयें खर्चा भी अदा करने का फैसला देते हुए न्यायालय द्वारा कमल कुलमी के खिलाफ डिक्री पारित की गई। प्रकरण में वादी/क्रेता कमल कालरा की ओर से अधिवक्ता के.पी. माहेश्वरी, प्रतीक माहेश्वरी, पवन तिवारी, अमृता सोनकर, पुनीत माहेश्वरी, सुनिल यादव, हरिओम परमार, अर्जुन प्रजापति, महक मिरानी द्वारा पैरवी की गई। उक्त जानकारी के.पी. माहेश्वरी अधिवक्ता ने दी।
