सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

शहर में होर्डिंग-पोस्टर हटाने का अभियान शुरू भर्ती फिर से शुरू करने की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने कहा भर्ती किए बिना निगम का बराबर संचालन संभव नहीं

नगर निगम के द्वारा पूरे शहर में होर्डिंग- पोस्टर हटाने का अभियान शुरू कर दिया गया है। वैसे शहर में इतनी बड़ी संख्या में होर्डिंग-पोस्टर लगे हैं कि ने हटाने उन्हें नगर निगम को कम से कम 15 दिन का समय लगेगा।

न्यायालय के द्वारा कल ही यह निर्देश दिया गया है कि शहर में किसी भी स्थान पर लगे हुए होर्डिंग-पोस्टर को हटाया जाए। इसमें खास तौर पर नेताओं और धार्मिक आयोजन के होर्डिंग- पोस्टर हटाने पर ध्यान देने के लिए कहा गया है। न्यायालय के इस आदेश के परिपेक्ष में इंदौर नगर निगम के द्वारा कल रात में ही कार्रवाई शुरू कर दी गई।

निगम के द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों से होर्डिंग-पोस्टर हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। इस कड़ी में सबसे पहले मुख्य मार्गो को लिया गया है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि अब लगातार होर्डिंग-पोस्टर हटाने की मूवी चलाई जाएगी।

वैसे इस तरह की मुहिम नगर निगम कई बार चला चुका है लेकिन निगम के अधिकारियों के द्वारा बराबर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण फिर से बड़ी संख्या में होर्डिंग और पोस्टर लग जाते हैं। एक समय था जब नगर निगम के द्वारा इंदौर शहर को होर्डिंग- पोस्टर से मुक्त शहर के रूप में तैयार करते हुए आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया गया था। उसे समय पर नगर निगम के अधिकारियों के द्वारा तत्परता के साथ काम किया जा रहा था।

इसके पीछे कारण यह था कि उस समय के नगर निगम के आयुक्त मनीष सिंह को यदि कहीं भी कोई होर्डिंग और पोस्टर लगा हुआ दिख जाता था तो संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों की परेड ली जाती थी। इस स्थिति के कारण ही इंदौर में हालात बेहतर हुए थे अब इस तरह की कोई स्थिति नहीं होने के कारण हालात बेलगाम हो गए हैं। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट ने मस्टर कर्मचारी की भर्ती फिर से शुरू करने की मांग की है।

उनका कहना है कि यह भारती फिर से किए बगैर नगर निगम का बराबर संचालन कर पाना संभव नहीं है। मिमरोट ने नगर निगम आयुक्त और महापौर को लिखे गए पत्र में कहा है कि इंदौर नगर निगम में हाल ही में दो बड़े घोटाले सामने आए हैं। इसमें से पहले घोटाला नामांतरण का है।

जिसमें की कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में जिस व्यक्ति का नाम सामने आया वह आउटसोर्स के आधार पर नगर निगम के द्वारा सेवा में लिया गया था। दूसरी गड़बड़ी का मामला वेतन घोटाले का रहा। इसमें भी पांच मस्टर कर्मचारी का वेतन दूसरे खाते में ट्रांसफर करने का काम हुआ।

इस काम को अंजाम देने वाले दोनों कर्मचारी आउटसोर्स के आधार पर नगर निगम की सेवा में लिए गए थे। उन्होंने कहा कि उक्त दोनों घटनाएं इस बात का साक्ष्य है कि आउटसोर्स के आधार पर इंदौर नगर निगम में जिन कर्मचारियों को लिया जाता है उन कर्मचारियों की नगर निगम के प्रति कोई आस्था नहीं रहती है। यह कर्मचारी तो यहां पर आकर पैसा कमाने में लग जाते हैं।

इन कर्मचारियों को यह स्पष्ट रूप से मालूम रहता है कि जितने समय के लिए हम नगर निगम में आए हैं उतने समय में जितना ज्यादा कमा सकते हैं कमा लें क्योंकि हमें यहां की नौकरी में कोई स्थाई करने वाला नहीं है। ऐसे में नगर निगम की सारी व्यवस्था बिगड़ने लगी है।

मिमरोट ने बताया कि उपरोक्त स्थिति को देखते हुए यह जरूरी है कि इंदौर नगर निगम में एक बार फिर दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की भर्ती शुरू की जाएं। यह कर्मचारी जब सेवा में रखे जाते हैं तो वह नगर निगम को अपनी मातृ संस्था के रूप में मानते हैं। इन कर्मचारियों को यह भरोसा रहता है कि आने वाले समय में उन्हें विनियमित कर्मचारियों के रूप में और फिर बाद में स्थाई कर्मचारियों के रूप में भी सेवा में रखा जा सकता है।

बहुत तेजी के साथ नगर निगम में स्थाई कर्मचारियों की संख्या कम होती जा रही है। हर महीने बड़ी संख्या में पुराने कर्मचारी सेवानिवृत्त होते जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में इंदौर नगर निगम की ओर से राज्य सरकार के पास एक प्रस्ताव भेजकर दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की भर्ती करने की अनुमति प्राप्त की जाएं।